जागृत होना क्या है ?


*पढा-लिखा होना और जागृत होना दोनो में अंतर है ।*

*किताबों को पढ लेने से, या डिग्रियां हासिल कर लेने से कोई जागृत नहीं कहा जा सकता।*

*हर शिक्षित व्यक्ति जागृत ही हो ऐसा नहीं है।*

*जागृति का प्रथम सिद्धांत है÷ अपने दोस्त की पहचान होना ।*

*जागृति का दूसरा सिद्धांत है÷ अपने दुश्मन की पहचान होना ।*

*जागृति का तीसरा सिद्धांत है÷ अपनी ताकत और कमजोरी मालूम होना ।*

*जागृति का चौथा सिद्धांत है÷ दुश्मन की ताकत और कमजोरी मालूम होना।*

*और जागृति का पांचवां सिद्धांत है÷ अपने महापुरुषों का इतिहास मालूम होना ।*

*यह पांच बातें अगर आपको मालूम है,और आप अनपढ़ भी हो,फिर भी आप जागृत कहे जा सकते हो ।*

*अगर आप को ये पांच बातें नहीं मालूम है, और आप शिक्षित भी हो, फिर भी आप जागृत नहीं हो ।*

*आप*
👉🏿👉🏿डॉक्टर,
👉🏿👉🏿वकील
👉🏿👉🏿इंजिनियर,
👉🏿👉🏿प्रोफेसर,
👉🏿👉🏿IPS,
👉🏿👉🏿lAS,
*हो सकते हो ।*
*मगर आप जागृत नहीं कहे जा सकते ।*

*शिक्षा के साथ साथ सामाजिक जागृति बहुत जरूरी है समाज उत्थान के लिये । हमारे पढे लिखे अधिकारी कर्मचारी PhD holder उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति को हमारा सही इतिहास नहीं पता । पता नहीं होना यह बुरी बात नहीं है*

*परन्तु जब पता चल जाये कि मेने सब कुछ पढा जो लोगों नें मुझे पढाया परन्तु मुझे मेरे महापुरुषों का इतिहास नहीं पता ।*
*हमारे महापुरुषों के जीवन संघर्ष और* *बलिदान, जिसकी वजह से हमें शिक्षा लेने का* *अधिकार , शिक्षा देने का* *अधिकार , सम्पत्ति रखने का अधिकार , शस्त्र धारण का अधिकार मिला ।*

*अगर यह जानकारी पता चल जाये*
*उसके बाद भी हमारा आदमी सिर्फ खाने पीनें* *बीवी बच्चों को पालने*
*घर, गृहस्थी जमाने, सम्पत्ति इकट्ठा करना ही जीवन का उद्देश्य रखता है ।*

*तो तुम्हारा तुम्हारे बच्चों का तुम्हारे जीवन का भविष्य सिर्फ और* *सिर्फ तुम्हारे समाज का दुश्मन ही तय करेगा ।*
*हो सकता है कि तुम बच जाओ*

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