संदेश

मोटिवेशन कहानी

कहानी पूरा पढोगे तो कहोगे वाह वाह 👉एक बार एक संत ने अपने दो      भक्तों को बुलाया और कहा आप      को यहाँ से पचास कोस जाना है। 👉एक भक्त को एक बोरी खाने के      समान से भर कर दी और कहा जो      लायक मिले उसे देते जाना 👉और एक को ख़ाली बोरी दी उससे       कहा रास्ते मे जो उसे अच्छा मिले       उसे बोरी मे भर कर ले जाए। 👉दोनो निकल पड़े जिसके कंधे पर      समान था वो धीरे चल पा रहा था 👉ख़ाली बोरी वाला भक्त आराम से       जा रहा था 👉थोड़ी दूर उसको एक सोने की ईंट      मिली उसने उसे बोरी मे डाल      लिया 👉थोड़ी दूर चला फिर ईंट मिली उसे      भी उठा लिया 👉जैसे जैसे चलता गया उसे सोना      मिलता गया और वो बोरी मे भरता      हुआ चल रहा था 👉और बोरी का वज़न। बड़ता गया       उसका चलना मुश्किल होता गया      और साँस भी चढ़ने लग गई 👉एक एक क़दम मुश्किल ह...

*मुझे मत जलाओ*

*मुझे मत जलाओ* तुम मुझे क्यों जलाते हो जलाकर मुझे शराब पीते हो, भांग भी पीते हो अ-वीर भी लगाते हो। लड़ते हो, झगड़ते हो घायल भी हो जाते हो, मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा तुम मुझे क्यों जलाते हो। हरदोई की रहने वाली हिरणयकश्यप की बहन हूं, मेरा भाई है, वो तेरा भाई होली हूं, तेरी भी बहन हूं। होली नाम से मुझे जलाकर तुम क्यों इतराते हो, नारी के पुतले को जलाकर तुम बहादुर कहलाते हो? बहादुर नहीं तुम कायर हो तभी तो अ-वीर लगाते हो, मनुवादी झूंठी कहानी सुनकर तुम मुझे क्यों जलाते हो। नारी का मत अपमान करो न कायरता दिखलाओ, मैं भी बहुजनो की बहन हूं अपनापन दिखलाओ। अगर जलाना ही शौक है तेरा तो मनुस्मृति को जलाओ, बाबा साहेब ने यही कहा था भीम मिशन आगे बढ़ाओ। *मुझे मत जलाओ।* *होली दहन बन्द करो।*

पाखंड

पाखंडी कविता  खूब पूजे ब्रह्मा विष्णु और महेश । घर में बचा ना कुछ भी शेष ।। खूब कराये यज्ञ और हवन । घर बेचकर पहुँच गए वन ।। खूब घूमें तीर्थ यात्रा । घर में बची ना अन्न की तनिक भी मात्रा ।। खूब गंगा जमुना नहाये । लौट के बुद्धू घर को आये ।। खूब पूजे लक्ष्मी गणेश । पैसा बचा ना एक भी शेष ।। दिया पंडो को भी खूब दान । मिला नही कहीं भगवान ।। पूजे खूब लक्ष्मण राम । घर के बिगड़े सारे काम ।। किये खूब व्रत उपवास । अपना शरीर भी रहा ना पास ।। खूब रखे पत्नी ने करवा चौथ । फिर भी पत्नी से पहले पति को आ गयी मौत ।। खूब पूजे लक्ष्मी दुर्गा और काली माई । घर में रही ना एक भी पाई ।। खूब बजाये मैंने मंदिर में घंटा । फिर भी भरा ना मेरा अंटा ।। खूब चढ़ाये मैंने माला फूल । फिर भी साफ़ हुई ना मन की धूल ।। खूब जलाई मैंने अगरबत्ती और धूप । फेफड़ो को धुआं जलाता खूब  इस कविता को अवश्य पढे है ऊँच नीच का रोग जहाँ मैं उस देश की गाथा गाता हूँ। भारत में रहने वालों की मैं दोगली बात बाताता हूँ।। भगवानों के नाम यहाँ मूर्ति पूजी जाती है। मन्दिर में जाने वालों की जाति पूछी जाती ...

वित्त आयोग का गठन

        वित्त आयोग पहला वित्त आयोग 1951 में गठित किया गया था। अब तक 15 वित्त आयोग गठित किये जा चुके हैं जो निम्न हैं-   वित्त आयोग - नियुक्ति वर्ष- ------अध्यक्ष --------- रिपोर्ट देने का वर्ष ------ रिपोर्ट प्रभावी रहने की अवधि  पहला------------- 1951---------- के. सी. नियोगी ------- 1953 ---------------------- 1953-1957  दूसरा ------------- 1956 ---------- के. संथानम----------- १९५७-------------------------   1957-1962  तीसरा ------------ 1960 ---------- ए. के. चंदा------------ 1962----------------------- 1962- 1966 चौथा -------------- 1964--------- डा. पी. वी. राजमन्नार-- 1966-----------------------1966-1969 पांचवा------------ 1968---------- महवीर त्यागी ---------- 1969---------------------- 1969- 1974 छठा ------------- 1972---------   ब्रह्मानंद रेड्डी ----------- 1973 ----------------------1974- 1979 सातवां------------ 1977---------- जे. पी. शेलात ---------- 1978---------------------- 1979- 1984...

आष्टांग मार्ग के अनुसार II

आष्टांग मार्ग के अनुसार  शील   सम्यक कर्मान्त :-                           सम्यक कर्मान्त हमे कुशल ब्यवहार की शिक्षा देता है जिसमे किसी दूसरे ब्यक्ति की भावनाओ और अधिकारों की क्षति न पहुंचे तथा हमारे कार्य का समन्वय जीवन के मुख्या नियमो स अधिक से अधिक हो सके.  जीव हिंसा, मिथ्याचार, चोरी, ब्यभिचार रहित कर्म करना ही सम्यक कर्मान्त है.  सम्यक आजीविका :-                           सम्यक आजीविका इस प्रकार की होनी चाहिए जिसमें किसी की हानि न हो न ही किसी  के प्रति  अन्याय हो।  सामान्य स्थितियों में हमें हथियारों का ब्यापार, प्राणियों का ब्यापार, मांस का ब्यापार, मद्य का ब्यापार व विष का ब्यापार नहीं करना चाहिए।  यही  वास्तविक सम्यक जीविका है। सम्यक ब्यायाम :-              ...

अष्टांग मार्ग के अनुसार

अष्टांग  मार्ग के अनुसार प्रज्ञा  सम्यक दर्ष्टि :-                     सम्यक दर्ष्टि का तातपर्य  यह है कि जो वास्तु प्राकृतिक रूप में जैसी है, उसको वैसा ही समझना अर्थात चार आर्यो का दर्शन करना , समझाना , प्रतीत्यसमुत्पाद का ज्ञान होना, इस प्रकार समस्त धर्मो के स्वाभाव को जानना कि संस्कार अनित्य है, सभी संस्कार दुख हैं, सभी संस्कार अनात्म हैं, का बोधा होना ही सम्यक दर्ष्टि है.  सम्यक संकल्प :-                        सम्यक संकल्प का अर्थ है कि  राग, हिंसा तथा प्रतिहिंसा रहित संकल्प रखना। अर्थात हमारी आशाएं, आकांछाएं एवं महत्वकांछाएं ऊँचे स्तर की हों, निम्न स्तर की न हों तथा हमारे योग्य हो अयोग्य नहीं।  सम्यक वाणी :-                      इसका अर्थ यह है कि -  १. सत्य  बोलना।   २. दुसरो की बुराई न करना।...

बौद्ध धर्म आर्य अष्टांगिक मार्ग

बौद्ध धर्म के अनुसार आर्य अष्टांगिक मार्ग    १. सम्यक दर्ष्टि २.  सम्यक संकल्प ३. सम्यक वाणी ४. सम्यक कर्मात ५. सम्यक आजीविका ६. सम्यक ब्यायाम ७. सम्यक स्मृति ८.  सम्यक समाधी उपरोक्त अष्टांगिक मार्गो में से पहले तीन मार्ग प्रज्ञा , दूसरे तीन मार्ग शील के तथा अंतिम दो मार्ग समाधी के हैं.      इन  मार्गो के विषय में अगली पोष्ट पर  पढ़े                                                                       नमो  बुद्धाय