होली पर विचारणीय बिंदु

होलिका भली थी या बुरी यह तो मैं नहीं जानता।पर पढ़ लिखकर इतना जरूर समझा कि होली किसी स्त्री को जिन्दा जलाकर जश्न मनाने की सांकेतिक पुनरावृत्ति है ।मैंने विभिन्न प्रसंगों में यह सुना कि जो जन्म लेता है उसकी मृत्यु निश्चित है,  फिर होलिका के साथ प्रहलाद आग में न जले ऐसा सम्भव नहीं ।अभी तक मेरे मन में उठे इस प्रश्न का जवाब मैं नहीं पाया कि रात्रिकाल में क्यों किसी स्त्री को जलाया गया? अभी तक रात्रि में शवदाह की परम्परा हमारी संस्कृति में नहीं है ।होलिका का दोष क्या था ? होलिका को किसने जलाया?  क्या होलिका को जलाने समय उसके परिजन वहाँ मौजूद थे ?
पहले मैं इस बारे में सोचा भी नहीं था । परंतु शिक्षा एक ऐसी रसायन है जो मन में तर्क करने की क्षमता का विकास कर देती है ।
अब मैं उस त्योहार के लिए आप सबको कैसे बधाई एवं शुभकामनाएँ दूँ जिस त्योहार में किसी स्त्री को जलाया गया हो।
जो होलिका दहन करता है क्या वह स्वयं अपने अंदर की बुराई को जला पाया है  ? यदि नहीं तो उसे किसी दूसरे बुरे आदमी को जलाने का अधिकार किसने दिया?
माफ कीजिएगा मित्रों मैं इस स्त्री विरोधी त्योहार में आपको बधाई नहीं दे पाऊँगा।मेरे विचार से आप भी सहमत हों ?  यही उम्मीद कर सकते हैं

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