108 का अर्थ
🌻धम्म प्रभात 🌻
तण्हा-- तृष्णा
(प्रतीत्य समुत्पाद की आठवीं कडी)
वेदना पच्चया तण्हा।
वेदना के कारण (प्रत्यय) से तृष्णा।
तथागत बुद्ध ने कहा -
यायं तण्हा पोनोभविका नन्दिरागसहगता तत्रतत्राभिनन्दिनी, सेय्याथीदं - कामतण्हा, भवतण्हा, विभवतण्हा - यो जो तृष्णा हैं - फिर जन्म ने की, नन्दिराग सहित जहां तहां प्रसन्न होने वाली, जैसे कि काम तृष्णा, भव तृष्णा, विभव तण्हा।
वेदना के कारण तृष्णा उत्पन्न होती हैं।
भिक्खुओ को संबोधित करते हुए घम्म सेनापति सारिपुत्त ने कहा -
जब आवुस ! आर्य श्रावक तृष्णा को जानता हैं, तृष्णा के समुदय (कारण) को जानता हैं, तृष्णा के निरोघ को जानता हैं तब वह तृष्णा का मुलोच्छेद करने के लिए प्रयत्न करता हैं।
आवुस! तृष्णा के यह छः आकार हैं - रुप तृष्णा, शब्द तृष्णा, गंध तृष्णा, रस तृष्णा, स्प्रष्टव्य तृष्णा, धम्म तृष्णा ।
वैसे मुख्यतः काम तृष्णा भव तृष्णा, विभव तृष्णा - ये तीन ही हैं।
इसके पहले के छःसे गुणा करने से अठारह तृष्णाएं (3 ×6=18) हो जाती हैं।
इसको आध्यात्मिक एवं बाह्य इन दो सन्तानों से गुणा करने से तृष्णाओं की संख्या 3 6 (18×2 =3 6) हो जाती हैं।
इसको भी तीन कालों से गुणा करने से यह संख्या 108 (36×3 =108)हो जाती हैं।
नमो बुद्धाय
तण्हा-- तृष्णा
(प्रतीत्य समुत्पाद की आठवीं कडी)
वेदना पच्चया तण्हा।
वेदना के कारण (प्रत्यय) से तृष्णा।
तथागत बुद्ध ने कहा -
यायं तण्हा पोनोभविका नन्दिरागसहगता तत्रतत्राभिनन्दिनी, सेय्याथीदं - कामतण्हा, भवतण्हा, विभवतण्हा - यो जो तृष्णा हैं - फिर जन्म ने की, नन्दिराग सहित जहां तहां प्रसन्न होने वाली, जैसे कि काम तृष्णा, भव तृष्णा, विभव तण्हा।
वेदना के कारण तृष्णा उत्पन्न होती हैं।
भिक्खुओ को संबोधित करते हुए घम्म सेनापति सारिपुत्त ने कहा -
जब आवुस ! आर्य श्रावक तृष्णा को जानता हैं, तृष्णा के समुदय (कारण) को जानता हैं, तृष्णा के निरोघ को जानता हैं तब वह तृष्णा का मुलोच्छेद करने के लिए प्रयत्न करता हैं।
आवुस! तृष्णा के यह छः आकार हैं - रुप तृष्णा, शब्द तृष्णा, गंध तृष्णा, रस तृष्णा, स्प्रष्टव्य तृष्णा, धम्म तृष्णा ।
वैसे मुख्यतः काम तृष्णा भव तृष्णा, विभव तृष्णा - ये तीन ही हैं।
इसके पहले के छःसे गुणा करने से अठारह तृष्णाएं (3 ×6=18) हो जाती हैं।
इसको आध्यात्मिक एवं बाह्य इन दो सन्तानों से गुणा करने से तृष्णाओं की संख्या 3 6 (18×2 =3 6) हो जाती हैं।
इसको भी तीन कालों से गुणा करने से यह संख्या 108 (36×3 =108)हो जाती हैं।
नमो बुद्धाय
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें