संदेश

मोटिवेशन कहानी

कहानी पूरा पढोगे तो कहोगे वाह वाह 👉एक बार एक संत ने अपने दो      भक्तों को बुलाया और कहा आप      को यहाँ से पचास कोस जाना है। 👉एक भक्त को एक बोरी खाने के      समान से भर कर दी और कहा जो      लायक मिले उसे देते जाना 👉और एक को ख़ाली बोरी दी उससे       कहा रास्ते मे जो उसे अच्छा मिले       उसे बोरी मे भर कर ले जाए। 👉दोनो निकल पड़े जिसके कंधे पर      समान था वो धीरे चल पा रहा था 👉ख़ाली बोरी वाला भक्त आराम से       जा रहा था 👉थोड़ी दूर उसको एक सोने की ईंट      मिली उसने उसे बोरी मे डाल      लिया 👉थोड़ी दूर चला फिर ईंट मिली उसे      भी उठा लिया 👉जैसे जैसे चलता गया उसे सोना      मिलता गया और वो बोरी मे भरता      हुआ चल रहा था 👉और बोरी का वज़न। बड़ता गया       उसका चलना मुश्किल होता गया      और साँस भी चढ़ने लग गई 👉एक एक क़दम मुश्किल ह...

*मुझे मत जलाओ*

*मुझे मत जलाओ* तुम मुझे क्यों जलाते हो जलाकर मुझे शराब पीते हो, भांग भी पीते हो अ-वीर भी लगाते हो। लड़ते हो, झगड़ते हो घायल भी हो जाते हो, मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा तुम मुझे क्यों जलाते हो। हरदोई की रहने वाली हिरणयकश्यप की बहन हूं, मेरा भाई है, वो तेरा भाई होली हूं, तेरी भी बहन हूं। होली नाम से मुझे जलाकर तुम क्यों इतराते हो, नारी के पुतले को जलाकर तुम बहादुर कहलाते हो? बहादुर नहीं तुम कायर हो तभी तो अ-वीर लगाते हो, मनुवादी झूंठी कहानी सुनकर तुम मुझे क्यों जलाते हो। नारी का मत अपमान करो न कायरता दिखलाओ, मैं भी बहुजनो की बहन हूं अपनापन दिखलाओ। अगर जलाना ही शौक है तेरा तो मनुस्मृति को जलाओ, बाबा साहेब ने यही कहा था भीम मिशन आगे बढ़ाओ। *मुझे मत जलाओ।* *होली दहन बन्द करो।*

पाखंड

पाखंडी कविता  खूब पूजे ब्रह्मा विष्णु और महेश । घर में बचा ना कुछ भी शेष ।। खूब कराये यज्ञ और हवन । घर बेचकर पहुँच गए वन ।। खूब घूमें तीर्थ यात्रा । घर में बची ना अन्न की तनिक भी मात्रा ।। खूब गंगा जमुना नहाये । लौट के बुद्धू घर को आये ।। खूब पूजे लक्ष्मी गणेश । पैसा बचा ना एक भी शेष ।। दिया पंडो को भी खूब दान । मिला नही कहीं भगवान ।। पूजे खूब लक्ष्मण राम । घर के बिगड़े सारे काम ।। किये खूब व्रत उपवास । अपना शरीर भी रहा ना पास ।। खूब रखे पत्नी ने करवा चौथ । फिर भी पत्नी से पहले पति को आ गयी मौत ।। खूब पूजे लक्ष्मी दुर्गा और काली माई । घर में रही ना एक भी पाई ।। खूब बजाये मैंने मंदिर में घंटा । फिर भी भरा ना मेरा अंटा ।। खूब चढ़ाये मैंने माला फूल । फिर भी साफ़ हुई ना मन की धूल ।। खूब जलाई मैंने अगरबत्ती और धूप । फेफड़ो को धुआं जलाता खूब  इस कविता को अवश्य पढे है ऊँच नीच का रोग जहाँ मैं उस देश की गाथा गाता हूँ। भारत में रहने वालों की मैं दोगली बात बाताता हूँ।। भगवानों के नाम यहाँ मूर्ति पूजी जाती है। मन्दिर में जाने वालों की जाति पूछी जाती ...

वित्त आयोग का गठन

        वित्त आयोग पहला वित्त आयोग 1951 में गठित किया गया था। अब तक 15 वित्त आयोग गठित किये जा चुके हैं जो निम्न हैं-   वित्त आयोग - नियुक्ति वर्ष- ------अध्यक्ष --------- रिपोर्ट देने का वर्ष ------ रिपोर्ट प्रभावी रहने की अवधि  पहला------------- 1951---------- के. सी. नियोगी ------- 1953 ---------------------- 1953-1957  दूसरा ------------- 1956 ---------- के. संथानम----------- १९५७-------------------------   1957-1962  तीसरा ------------ 1960 ---------- ए. के. चंदा------------ 1962----------------------- 1962- 1966 चौथा -------------- 1964--------- डा. पी. वी. राजमन्नार-- 1966-----------------------1966-1969 पांचवा------------ 1968---------- महवीर त्यागी ---------- 1969---------------------- 1969- 1974 छठा ------------- 1972---------   ब्रह्मानंद रेड्डी ----------- 1973 ----------------------1974- 1979 सातवां------------ 1977---------- जे. पी. शेलात ---------- 1978---------------------- 1979- 1984...

आष्टांग मार्ग के अनुसार II

आष्टांग मार्ग के अनुसार  शील   सम्यक कर्मान्त :-                           सम्यक कर्मान्त हमे कुशल ब्यवहार की शिक्षा देता है जिसमे किसी दूसरे ब्यक्ति की भावनाओ और अधिकारों की क्षति न पहुंचे तथा हमारे कार्य का समन्वय जीवन के मुख्या नियमो स अधिक से अधिक हो सके.  जीव हिंसा, मिथ्याचार, चोरी, ब्यभिचार रहित कर्म करना ही सम्यक कर्मान्त है.  सम्यक आजीविका :-                           सम्यक आजीविका इस प्रकार की होनी चाहिए जिसमें किसी की हानि न हो न ही किसी  के प्रति  अन्याय हो।  सामान्य स्थितियों में हमें हथियारों का ब्यापार, प्राणियों का ब्यापार, मांस का ब्यापार, मद्य का ब्यापार व विष का ब्यापार नहीं करना चाहिए।  यही  वास्तविक सम्यक जीविका है। सम्यक ब्यायाम :-              ...

अष्टांग मार्ग के अनुसार

अष्टांग  मार्ग के अनुसार प्रज्ञा  सम्यक दर्ष्टि :-                     सम्यक दर्ष्टि का तातपर्य  यह है कि जो वास्तु प्राकृतिक रूप में जैसी है, उसको वैसा ही समझना अर्थात चार आर्यो का दर्शन करना , समझाना , प्रतीत्यसमुत्पाद का ज्ञान होना, इस प्रकार समस्त धर्मो के स्वाभाव को जानना कि संस्कार अनित्य है, सभी संस्कार दुख हैं, सभी संस्कार अनात्म हैं, का बोधा होना ही सम्यक दर्ष्टि है.  सम्यक संकल्प :-                        सम्यक संकल्प का अर्थ है कि  राग, हिंसा तथा प्रतिहिंसा रहित संकल्प रखना। अर्थात हमारी आशाएं, आकांछाएं एवं महत्वकांछाएं ऊँचे स्तर की हों, निम्न स्तर की न हों तथा हमारे योग्य हो अयोग्य नहीं।  सम्यक वाणी :-                      इसका अर्थ यह है कि -  १. सत्य  बोलना।   २. दुसरो की बुराई न करना।...

बौद्ध धर्म आर्य अष्टांगिक मार्ग

बौद्ध धर्म के अनुसार आर्य अष्टांगिक मार्ग    १. सम्यक दर्ष्टि २.  सम्यक संकल्प ३. सम्यक वाणी ४. सम्यक कर्मात ५. सम्यक आजीविका ६. सम्यक ब्यायाम ७. सम्यक स्मृति ८.  सम्यक समाधी उपरोक्त अष्टांगिक मार्गो में से पहले तीन मार्ग प्रज्ञा , दूसरे तीन मार्ग शील के तथा अंतिम दो मार्ग समाधी के हैं.      इन  मार्गो के विषय में अगली पोष्ट पर  पढ़े                                                                       नमो  बुद्धाय

बुद्ध विचार

गौतम बुद्धा के सुविचार  १. जो गुजर गया उसके बारे में मत सोचो और भविष्य के सपने  देखो केवल वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करो.  २. आप पूरे  ब्रह्माण्ड में कही  ऐसे ब्यक्ति को खोज ले जो आप को आप से  आप से ज्यादा प्यार करता हो, आप पाएंगे की जितना प्यार आप  खुद से करते है उतना आपसे कोई नहीं कर सकता है.  ३. स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन है और विश्वाश सबसे अच्छा सम्बन्ध है.  ४. हमें  और कोई नहीं बचा सकता, हमें अपने रस्ते पर खुद चलना है.  ५. तीन चीजे ज्यादा देर तक नहीं छुपी रह सकती है - सूर्य चन्द्रमा और सत्य।  ६. आपका मन ही सब कुछ है, आप जैसा सोचेंगे वैसा बन जायेंगे.  ७. अपने शरीर को स्वस्थ्य रखना भी कर्तब्य है, अन्यथा आप अपने  मन  और सोच को अच्छा नहीं   पाएंगे। ८. हम अपनी सोच से ही निर्मित होते है, जैसा सोचते है वैसे ही बन जाते हैं. जब मन शुद्ध होता है तो खुशियां परछाईं की तरह आप के साथ  चलती हैं.  ९. अपनी स्वयं की   क्षमता से...

भारत में भगवान

तर्कसंगत तथ्य इन्सान ने ही भगवान का निर्माण किया है इसके तार्किक सबूत निम्नलिखित है 1.मनुष्य के अलावा दुनिया का एक भी प्राणी भगवान को नही मानता। 2.जहाँ इन्सान नही पहुँचा वहाँ एक भी मंदिर मस्जिद या चर्च नही मिला। 3.अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग देवता है। इसका मतलब इन्सान को जैसी कल्पना सुझी वैसा भगवान बनाया गया। 4.दुनिया मे अनेक धर्म पंथ और उनके अपने-अपने देवता है। इसका अर्थ भगवान भी एक नही। 5.दिन प्रतिदिन नये नये भगवान तैयार हो रहे है। 6.अलग-अलग प्रार्थनायें है। 7. माना तो भगवान नही तो पत्थर यह कहावत ऐसे ही नही बनी। 8.दुनिया मे देवताओं के अलग-अलग आकार और उनको प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग पुजा। 9.अभी तक किसी इन्सान को भगवान मिलने के कोई प्रमाण नही है। 10.भगवान को मानने वाला और नही मानने वाला भी समान जिंदगी जीता है। 11भगवान किसी का भी भला या बुरा नही कर सकता। 12.भगवान भ्रष्टाचार अन्याय चोरी बलात्कार आतंकवाद अराजकता रोक नही सकता। 13.छोटे मासुम बच्चों पर बंदुक से गोलियाॅ दागने वालों के हाथ भगवान नही पकड सकता। 14.मंदिर मठ आश्रम प्रार्थना स्थल जहाॅ माना जाता है कि भ...

पर्यायवाची शब्द का नया तरीका

कविता द्वारा पर्यायवाची शब्द  ========================== सोम सुधाकर शशि राकेश                           राजा   भूपति   भूप   नरेश पानी अम्बु वारि या नीर                      वात हवा और अनिल समीर दिवा दिवस दिन या वासर                        पर्वत   अचल   शैल महिधर विश्व जगत जग भव संसार                         घर गृह आलय या आगार अग्नि पावक आग दहन                         ...

नए वर्ष पर

चित्र
नव वर्ष की मंगल कामनाएं  नए वर्ष की  नई पहल हो।  कठिन जिंदगी और सरल हो।   अन सुलझी जो रही पहेली।  अब उसका  शायद हल हो।   जो चलता है वक्त देखकर। आगे जाकर वही सफल हो ।    नए वर्ष  का उगता सूरज।  सबके लिए सुनहरा पल हो।  समय हमारा साथ सदा दे।   कुछ ऐसी हलचल आगे हो।   सुख के चौक पूरे हर द्वारे।  सुखमय आँगन का हर पल हो। 

बौध्द राष्ट्र भारत

☸🇮🇳 *भारत एक बौद्ध राष्ट्र* 🇮🇳☸ ====== *|||563|||* ======     ☸ *1 : भारतीय संविधान* संपूर्ण प्राणी जगत में प्राचीन भारत को स्वर्णिम भारत, सोने की चिड़िया, अखंड भारत, विश्व विजयी, विश्व गुरु, एशिया का प्रकाश, प्रबुद्ध, सत्य, अहिंसा, शांति, करुणा, दया, बंधुत्व इत्यादि से खुशहाल केवल तथागत बुद्ध, चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य, चक्रवर्ती धम्म सम्राट प्रियदर्शी अशोक महान से ही जाना जाता है। इस अद्वितीय, गौरवशाली, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक, समतामूलक एवं मानवीय लोक-कल्याणकारी अशोक धम्म शासन/गणराज्य को बाबा साहेब और संसद ने *स्वतंत्र भारत के संविधान के Preamble* में ही पूर्ण रूप से समावेशित कर आदर्श बौद्ध धम्म राष्ट्र के महत्व का देश एवं दुनियां को स्पस्ट लिखित संदेश दे दिया है। जो इस प्रकार है:-  ☸ *2: राष्ट्रपति के सिंहासन के शीर्ष पर "धम्मचक्कपवत्तनाय" का अंकित होना।* देश का सर्वोच्च पद राष्ट्रपति का होता है। जिस सिहांसन पर राष्ट्रपति के आसीन होने पर सुशोभित होता है। बुद्ध की गरिमा को ध्यान में रखते हुए *'राष्ट्रपति सिंहासन'* से भी ऊपर भगवान बुद्ध के मुख से लो...

भारत के राज्य

भारत के राज्य व  स्थापना वर्ष  १. अरुणाचल  प्रदेश   -  २०  फरवरी  1987  २. असम   -  26   जनवरी 1950  ३. आंध्रप्रदेश   -  01  नवम्बर 1956  ४. ओडिसा  -   01 अपैल  1936  ५. उत्तर प्रदेश  -    26   जनवरी 1950 ६. उत्तराखंड  - 09 नवम्बर 2000  ७.  कर्नाटक -    01  नवम्बर 1956 ८. केरल -    01  नवम्बर 1956 ९. गुजरात  -   01  मई 1960  १०. गोवा  -  30 मई 1987  ११. छत्तीसगढ़  -   0 1  नवम्बर 2000 १२. जम्मू और  कश्मीर  -    26   जनवरी 1950 १३. झारखंड  -  15 नवम्बर 2000  १४. तमिलनाडु  -   26   जनवरी 1950 १५. तेलंगना  -  02 जून 2014  १६. तिरपुरा  -   21  जनवरी 1972  १७....

पर्वो की विशेषता

मूलनिवासी पर्व (1) गुरु पूर्णिमा :- गौतम बुद्ध ने आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सारनाथ में प्रथम बार पांच परिज्रावको को दीक्षा दी थी। ये दिन बौद्धों के जीवन में गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता था। बौद्ध धर्म समाप्त करने के बाद ब्राह्मण धर्म के ठेकेदारो ने इस पर कब्ज़ा किया। (2) कुम्भ मेला :- कुम्भ का मेला बौद्ध सम्राट हर्षवर्धन ने शुरू करवाया था जिसका उद्देश्य बुद्ध की विचारधारा को फैलाना था। इस मेले में दूर दूर से बौद्ध भिक्षु, श्रमण,राजा,प्रजा, सैनिक भाग लेते थे। बौद्ध धर्म समाप्त करने के पश्चात ब्राह्मणों ने इसको अपने धर्म में  लेकर अन्धविश्वास घुसा दिया। (3) चार धाम यात्रा :- बौद्ध धर्म में चार धामों का विशेष महत्त्व था। ब्राह्मणों ने बौद्ध धर्म के चार धामो को अपने काल्पनिक देवी-देवताओ के मंदिरो में बदल दिया और अपने धर्म से जोड़ दिया। (4) जातक कथाएँ :-  जातक कथाये बौद्ध धर्म में विशेष महत्त्व रखती है। इन कथाओ द्वारा बौद्धिस्ट की दस परमिताओं को समझाया जाता था। कुछ कथाये गौतम बुद्ध काल की और कुछ बाद की लिखी गयी है। बौद्ध धर्म समाप्त करने के पश्चात ब्राह्मणों ने इन कथाओ क...

सत्य व अर्धसत्य

आइये समाज में फैले कुछ षड्यंत्रों पर प्रकाश डालें :- अर्धसत्य ---फलां फलां तेल में कोलेस्ट्रोल नहीं होता है! पूर्णसत्य --- किसी भी तेल में कोलेस्ट्रोल नहीं होता ये केवल यकृत में बनता है । ✅ अर्धसत्य ---सोयाबीन में भरपूर प्रोटीन होता है ! पूर्णसत्य---सोयाबीन सूअर का आहार है मनुष्य के खाने लायक नहीं है! भारत में अन्न की कमी नहीं है, इसे सूअर आसानी से पचा सकता है, मनुष्य नही ! जिन देशों में 8 -9 महीने ठण्ड रहती है वहां सोयाबीन जैसे आहार चलते है । ✅ अर्धसत्य---घी पचने में भारी होता है पूर्णसत्य---बुढ़ापे में मस्तिष्क, आँतों और संधियों (joints) में रूखापन आने लगता है, इसलिए घी खाना बहुत जरुरी होता है !और भारत में घी का अर्थ देशी गाय के घी से ही होता है । ✅ अर्धसत्य---घी खाने से मोटापा बढ़ता है ! पूर्णसत्य---(षड्यंत्र प्रचार ) ताकि लोग घी खाना बंद कर दें और अधिक से अधिक गाय मांस की मंडियों तक पहुंचे, जो व्यक्ति पहले पतला हो और बाद में मोटा हो जाये वह घी खाने से पतला हो जाता है✅ अर्धसत्य---घी ह्रदय के लिए हानिकारक है ! पूर्णसत्य---देशी गाय का घी हृदय के लिए अमृत है,  पं...

असम्भव बीमारी का पूर्ण इलाज

कैंसर का  १०० प्रतिशत इलाज संभव  पपीते के पत्तो से बनी चाय किसी  भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ ६० से ९० दिनों में जड़ से ख़त्म कर देगी  अभी तक लोगो ने केवल पपीते के पत्तो को बहुत ही सीमीत तरीके से उपयोग किया होगा जसे प्लेटलेट्स के कम होने पर या त्वचा संबंधी रोग हो जाने पर इसका उयपयोग किया  है. परन्तु पपीता यही तक सीमीत नहीं है इसके गुण और भी बहुत कुछ है.  पपीता प्राकृतिक शक्तियों से भरपूर है पपीता के सभी भागों फल, ताना , बीज, पत्तियां, जड़ , सभी के अंदर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसकी ब्रद्धी को रोकने का गुण बहुतायत पाया गया।    UNIVERSITY OF FLORIDA AND International Doctors And Researchers From US and Japan में हुए शोधो से पता चला है की पपीते के पत्तो में कैंसर की कोशिका  को नष्ट करने की छमता पाई जाती है . Nam Dang MD, Phd जो की एक शोध कर्ता हैं के अनुसार पपीता की पत्तियों से लगभग १० प्रकार का कैंसर समाप्त हो सकता है उनमे से  कुछ निम्न हैं  1. Breast cancer 2. Lung cancer 3. Liver cancer 4. Pancreatic...

संविधान से पहले कैसे थे पूर्वज

संविधान से पहले पूर्वज  हिन्दू का चोला पहने अंधेरे में जीने वाले इसे पढ़ो सायद ज़मीर जाग जाय आओ जाने और समझे, संविधान से पहले हमारे बाप दादा और हमारी पीढियां कहाँ, कैसे और किन हालातों में रहते थे = = = = = = = = = = = = = = = = 1 हम लोग कच्चे घरों में, तम्बूओं में, झोपडियो में अमीरों की हदों से हट कर गांव से बाहर तालाब किनारे रहते थे। 2 धर्म प्रथा, जाति प्रथा, सति प्रथा, छूत प्रथा, रीति रिवाज, संस्कृति, परंपराओं और अमीरों के अपने ही बनाए गए कायदे कानून के तहत हम गुलाम थे 3 अच्छा खाना, अच्छा पहनना, बडे लोगों की बराबरी करना, अपने हक के लिए लडना, और पढाई करने का हमें कोई भी हक नहीं था। 4 : हमारे वैद्य ( डाक्टर ),धर्म गुरु और हमारी पंचायतें भी अलग होती थी। 5 अमीर - गरीब, छोटे - बडे, ऊंच - नीच , और जातिवाद की दीवारें होती थी। 6 हम औरों के टुकडों पर पलने वाले थे। 7 हमारा अपना कुछ भी वजूद नहीं था। 8 समाज में हमारा आदर, मान , सम्मान,इज्जत, नाम और पहचान कुछ भी नहीं था। 9 हमें मनहूस समझा जाता था। 10 हमारी औरतों से मनचाही मनमानी और बदसलूकीया की जाती थी। 11 हमें गुलाम बना कर ख...

नाथू राम के विषय में विशेष

ऐसे 'बहादुर’, 'चरित्रवान’ और 'देशभक्त’ थे गांधी के हत्यारे नाथूराम एक टपोरी किस्म का व्यक्ति था जिसे कतिपय हिंदू उग्रवादियों ने गांधी की हत्या के लिए भाडे पर रखा हुआ था। जेल में उसकी चिकित्सा रपटों से पता चलता है कि उसका मस्तिष्क अधसीसी के रोग से ग्रस्त था...       महात्मा गांधी के हत्यारे गिरोह के सरगना नाथूराम गोडसे को महिमामंडित करने के जो प्रयास इन दिनों किए जा रहे हैं, वे नए नहीं हैं। गोडसे का संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बताया जाता रहा है और इसीलिए गांधीजी की हत्या के बाद देश के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने संघ पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि संघ गोडसे से अपने संबंधों को हमेशा नकारता रहा है और अपनी इस सफाई को पुख्ता करने के लिए वह गोडसे को गांधी का हत्यारा भी मानता है और उसके कृत्य को निंदनीय करार भी देता है। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर क्या वजह है कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के सत्तारूढ होने के बाद ही गोडसे को महिमामंडित करने का सिलसिला तेज हो गया? इस सिलसिले में एकाएक उसका मंदिर बनाने के प्रयास शुरू हो गए। उसकी 'जयंती’ और...

४० की उम्र अवस्य पढ़े

*ये उम्र चालीस की बड़ी अजीब होती है...!* न बीस का ज़ोश, न साठ की समझ, ये हर तरफ से गरीब होती है। *ये उम्र चालीस की बड़ी अजीब होती है...!* सफेदी बालों से झांकने लगती है, तेज़ दौड़ो तो सांस हाँफने लगती है। टूटे ख़्वाब, अधूरी ख़्वाहिशें, सब मुँह तुम्हारा ताकने लगती है। ख़ुशी बस इस बात की होती है, की ये उम्र सबको नसीब होती है। *ये उम्र चालीस की बड़ी अजीब होती है...* न कोई हसीना मुस्कुराके देखती है, ना ही नजरों के तीर फेंकती है, और आँख लड़ भी जाये जो गलती से, तो ये उम्र तुम्हें दायरे में रखती है। कदर नहीं थी जिसकी जवानी  में, वो पत्नी अब बड़ी करीब होती है *ये उम्र चालीस की बड़ी अजीब होती है...!* वैसे, नज़रिया बदलो तो शुरू से शुरवात हो सकती है, आधी तो अच्छी गुज़री है, आधी और बेहतर गुज़र सकती है। थोड़ा बालों को काला और दिल को हरा कर लो, अधूरी ख्वाहिशों से  कोई समझौता कर लो। ज़िन्दगी तो चलेगी अपनी रफ़्तार से, तुम बस अपनी रफ़्तार काबू में कर लो। फिर देखिए ये कितनी खुशनसीब होती है .. *ये उम्र चालीस की बड़ी अजीब होती है...!* *40 की उम्र के समीप (आस- पास) पहुचे सभी म...

बौद्ध परम्परा के अनुसार चतुर्मास /वर्षावास

चतुर्मास /वर्षावास                 ------------------------------------------------  वर्षावास जिसे पाली भाषा में वस्सावास कहा जाता है। वर्षावास का अभिप्राय किसी एक स्थान पर वास करना या निवास करना होता है । बौद्ध परंपरा में आषाढ़ मास की पूर्णमासी से वर्षावास प्रारंभ होता है और आश्विन मास की पूर्णमासी को समाप्त होता है । यह वर्षावास 4 माह का होता है । इसलिए इसे चतुर्मास भी कहते हैं । इस दौरान बौद्ध भिक्षु किसी एक बुद्ध विहार में रहकर अध्ययन करते हैं, ध्यान साधना करते हैं , ज्ञान अर्जन करते हैं , फिर पुनः वर्ष के शेष महीनों में भ्रमण या चारिका करने निकल पडते हैं। 1. आषाढ मास की पूर्णिमा को सिद्धार्थ गौतम मानवता के कल्याण के लिए गृहत्याग किए थे , जिसे महाभिनिष्क्रमण कहा जाता है। इसी दिन बोधगया में बुद्धत्व प्राप्ति के उपरांत सारनाथ/ इसीपत्तन में पंचवग्गीय भिक्षुओं को प्रथम बार धर्म उपदेश दिया था। पहला ज्ञान दिया था । इसलिए इसे धम्मचक्क पवत्तन कहा जाता है। 2. सावन मास की पूर्णमासी को बौद्ध धर्म परिषद द्वारा मगध नरेश बिंबसार के पुत्र अजातशत्रु...