शिक्षा ब्यवस्था
उत्तर प्रदेश शिक्षा ब्यवस्था
जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी की योगी सरकार आयी थी और योगी जी cm बने तो सोचा था शिक्षा विभाग का जो मजाक उडाया जाता था वो कुछ हद तक समाप्त होगा पर मैं गलत था मै भूल गया था कि चेहरे बदलते हैं सरकारें नहीं !!
लूटने ,झूठ बोलने , वेतन /पारीश्रमिक कम देना और कर्मचारियो को शोषण करने के लिये कल की सरकारें भी अग्रणी थीं और आज की बीजेपी सरकार भी अग्रणी है।।
सोचा था मैंने कि प्रदेश को जब नये निजाम मिलेंगे तो up के प्रत्येक प्राइमरी विद्यालय को कम से कम प्रत्येक class(कक्षा1,2,3,4,5) को कम से कम पाँच 5 अध्यापक (teacher)(शिक्षक)मिल सकेंगे तथा एक प्रधानाध्यापक जो 5 शिक्षक अपनी अपनी class में अलग अलग केवल शिक्षा का काम आराम से शिक्षण कार्य में करा सकें !! पर मै यहाँ भी गलत साबित हुआ । इनसे तो बेहतर पूर्व की सरकार थी जो प्रत्येक विद्यालय मे पर्याप्त शिक्षक पहुँचा देने का दमखम भरती थी । इस समय प्रदेश मे सरप्लस अध्यापक की हवा चल रही है , क्या परिभाषा है आपके सरप्लस की......आपके अनुसार सरप्लस तब है जब मेरे विद्यालय मे 88 बच्चे हैं और शिक्षक चार हैं तो आपके मानक अनुसार एक शिक्षक सरप्लस है ।
_अखंड पागलपन तो तब होता है जब ये कहते हैं कि 65000 शिक्षक बढ़ती हैं वो भी तब की संख्या को आधार बनाया गया जब स्कूल बंद होने को होते हैं या हो चुके होते हैं यानि मई माह की जब बच्चे छुट्टियों पर होते हैं जबकि इतिहास गवाह है की बच्चों की संख्या हमेशा सितम्बर की ली जाती है और नोट की जाती है !!
जनाब ये बढती नही हैं, ये बढती अध्यापक विद्यालयों की जरूरतों के अनुसार लगे हैं ।_
गुणवत्ता का ढिढोरा पीटने से पहले यह सोच लीजियेगा की तीन अध्यापक 80 बच्चों की 5 कक्षाओं को समयानुसार कैसे संचालित कर सकता है ?? यह सवाल प्रदेश के निजाम और शिक्षा मंत्री जी से है । शिक्षा मंत्री महोदया जी जब आपके परिवार मे बच्चा विद्यालय जाता है यदि वो कक्षा 2d मे पढता है और उसका अध्यापक उसको कक्षा तीन या चार मे बैठाकर शिक्षा दें तो क्या आपका बच्चा बेहतर गुणवत्ता हासिल करेगा या सिर्फ खानापूरी होगी ।।
साहब , जब तक प्रत्येक विद्यालय को पाँच अध्यापक नही मिलते तब तक बेहतर शिक्षा दे पाना और गुणवत्ता की माँग करना बेईमानी है । बेशक कुछ लोग अभी रोना रोयेगे कि कुशल शिक्षक वही जो कम संसाधन मे बेहतर करे तो उन मूर्खो के शिलालेखों से कहूँगा कि बच्चे संसाधन नही भविष्य हैं । यह वह भविष्य है जो आने वाले युग का निर्माण करेगे । यदि सरकारें करोडो रुपए अडानी अंबानी रूपानी माल्या आदि इन जैसे बिजनसमैन को टैक्स और ऋण के रूप में दान कर सकते हैं तो क्या हमारी सरकारें बच्चों के बेहतर भविष्य हेतु युवा बेरोजगारों को रोजगार देते हुये शिक्षा की गुणवत्ता मे चार चाँद नहीं लगा सकती क्या ???
या इनसे ही सरकारों पर खर्चों का बोझ पडेगा ।।
....सोचने का विषय यह है कि क्या सचमुच सरकारें शिक्षा व्यवस्था को सही दिशा की ओर ले जा रही हैं ??????
क्या सच मुच पदों के लिए RTE के मानक का पालन किया जा रहा है ???????
क्या सचमुच शिक्षक सरप्लस हैं ???????
क्या सचमुच सभी स्कूल 100 % शिक्षक युक्त हैं ???????
क्या सचमुच उपलब्ध कराये गए आकड़ो में अंतर नहीं है ???????
क्या सचमुच आकड़ो में हेरे फेर नहीं किया गया क्या ये 100% सत्य हैं ???????
इतने बड़े प्रदेश में 1 माह में सरप्लस में आंकड़े तैयार करके उस पर अमल करना संदेह के घेरे में है इसमें 100% कही कुछ गड़बड़ है।
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*2008 से 2017 तक 10 साल हुए इन 10 साल में कुल लगभग 3 लाख भर्तिया शिक्षको की हुई अगर मान लिया जाये 15 हजार शिक्षक हर साल रिटायर्ड होते हैं तो 2008 से 2017 तक 10 सालो में 1लाख 50 हजार(150000) शिक्षक रिटायर्ड हो गए 3 लाख में से 1लाख 50 हजार घटाने पर 1लाख 50 हजार बचा मतलब साफ़ है यानि 1लाख 50 हजार ही केवल भर्ती हुई 3 लाख नहीं या यूँ कहिये की अभी भी 1लाख 50 हजार से कहीँ अधिक पद शिक्षको के अभी 100% ख़ाली हैं या होने चाहिए बस एक उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए ।।
जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी की योगी सरकार आयी थी और योगी जी cm बने तो सोचा था शिक्षा विभाग का जो मजाक उडाया जाता था वो कुछ हद तक समाप्त होगा पर मैं गलत था मै भूल गया था कि चेहरे बदलते हैं सरकारें नहीं !!
लूटने ,झूठ बोलने , वेतन /पारीश्रमिक कम देना और कर्मचारियो को शोषण करने के लिये कल की सरकारें भी अग्रणी थीं और आज की बीजेपी सरकार भी अग्रणी है।।
सोचा था मैंने कि प्रदेश को जब नये निजाम मिलेंगे तो up के प्रत्येक प्राइमरी विद्यालय को कम से कम प्रत्येक class(कक्षा1,2,3,4,5) को कम से कम पाँच 5 अध्यापक (teacher)(शिक्षक)मिल सकेंगे तथा एक प्रधानाध्यापक जो 5 शिक्षक अपनी अपनी class में अलग अलग केवल शिक्षा का काम आराम से शिक्षण कार्य में करा सकें !! पर मै यहाँ भी गलत साबित हुआ । इनसे तो बेहतर पूर्व की सरकार थी जो प्रत्येक विद्यालय मे पर्याप्त शिक्षक पहुँचा देने का दमखम भरती थी । इस समय प्रदेश मे सरप्लस अध्यापक की हवा चल रही है , क्या परिभाषा है आपके सरप्लस की......आपके अनुसार सरप्लस तब है जब मेरे विद्यालय मे 88 बच्चे हैं और शिक्षक चार हैं तो आपके मानक अनुसार एक शिक्षक सरप्लस है ।
_अखंड पागलपन तो तब होता है जब ये कहते हैं कि 65000 शिक्षक बढ़ती हैं वो भी तब की संख्या को आधार बनाया गया जब स्कूल बंद होने को होते हैं या हो चुके होते हैं यानि मई माह की जब बच्चे छुट्टियों पर होते हैं जबकि इतिहास गवाह है की बच्चों की संख्या हमेशा सितम्बर की ली जाती है और नोट की जाती है !!
जनाब ये बढती नही हैं, ये बढती अध्यापक विद्यालयों की जरूरतों के अनुसार लगे हैं ।_
गुणवत्ता का ढिढोरा पीटने से पहले यह सोच लीजियेगा की तीन अध्यापक 80 बच्चों की 5 कक्षाओं को समयानुसार कैसे संचालित कर सकता है ?? यह सवाल प्रदेश के निजाम और शिक्षा मंत्री जी से है । शिक्षा मंत्री महोदया जी जब आपके परिवार मे बच्चा विद्यालय जाता है यदि वो कक्षा 2d मे पढता है और उसका अध्यापक उसको कक्षा तीन या चार मे बैठाकर शिक्षा दें तो क्या आपका बच्चा बेहतर गुणवत्ता हासिल करेगा या सिर्फ खानापूरी होगी ।।
साहब , जब तक प्रत्येक विद्यालय को पाँच अध्यापक नही मिलते तब तक बेहतर शिक्षा दे पाना और गुणवत्ता की माँग करना बेईमानी है । बेशक कुछ लोग अभी रोना रोयेगे कि कुशल शिक्षक वही जो कम संसाधन मे बेहतर करे तो उन मूर्खो के शिलालेखों से कहूँगा कि बच्चे संसाधन नही भविष्य हैं । यह वह भविष्य है जो आने वाले युग का निर्माण करेगे । यदि सरकारें करोडो रुपए अडानी अंबानी रूपानी माल्या आदि इन जैसे बिजनसमैन को टैक्स और ऋण के रूप में दान कर सकते हैं तो क्या हमारी सरकारें बच्चों के बेहतर भविष्य हेतु युवा बेरोजगारों को रोजगार देते हुये शिक्षा की गुणवत्ता मे चार चाँद नहीं लगा सकती क्या ???
या इनसे ही सरकारों पर खर्चों का बोझ पडेगा ।।
....सोचने का विषय यह है कि क्या सचमुच सरकारें शिक्षा व्यवस्था को सही दिशा की ओर ले जा रही हैं ??????
क्या सच मुच पदों के लिए RTE के मानक का पालन किया जा रहा है ???????
क्या सचमुच शिक्षक सरप्लस हैं ???????
क्या सचमुच सभी स्कूल 100 % शिक्षक युक्त हैं ???????
क्या सचमुच उपलब्ध कराये गए आकड़ो में अंतर नहीं है ???????
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इतने बड़े प्रदेश में 1 माह में सरप्लस में आंकड़े तैयार करके उस पर अमल करना संदेह के घेरे में है इसमें 100% कही कुछ गड़बड़ है।
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*2008 से 2017 तक 10 साल हुए इन 10 साल में कुल लगभग 3 लाख भर्तिया शिक्षको की हुई अगर मान लिया जाये 15 हजार शिक्षक हर साल रिटायर्ड होते हैं तो 2008 से 2017 तक 10 सालो में 1लाख 50 हजार(150000) शिक्षक रिटायर्ड हो गए 3 लाख में से 1लाख 50 हजार घटाने पर 1लाख 50 हजार बचा मतलब साफ़ है यानि 1लाख 50 हजार ही केवल भर्ती हुई 3 लाख नहीं या यूँ कहिये की अभी भी 1लाख 50 हजार से कहीँ अधिक पद शिक्षको के अभी 100% ख़ाली हैं या होने चाहिए बस एक उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए ।।
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