अपनी भावना

अपनी भावना पर नियंत्रण रखे क्योकि आप की भावनाओ की किसी को कोई परवाह नहीं होती है।  आप सोचते है  की हम अपने अनुसार सही कह रहे हैं पर वह बात दूसरे के लिए सही हो  सकती है और नहीं भी।  अतः आप अपनी बात को सामने वाले के हिसाब से ही बोलने का प्रयास करे लेकिन यह कैसे सम्भव हो की सामने वाला क्या चाह रहा है? यह बात विचारणीय है फिर भी आप उस ब्यक्ति से मिलते जुलते रहते है तो सामने वाले की भावना कुछ हद तक तो पता हो ही जाती है . अतः  बोलने से पहले विचार अवश्य करे और दुसरो की नजरो में सफल बने रहने का प्रयास करें और सफलता तभी मिलेगी जब आप अपनी भावनाओं  पर नियंत्रण रख सकेंगे।

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