कर्म भोग

⛳कर्म भोग 🌾 ➰➰➰➰➰➰➰

➰➰➰ एक गाँव मे एक किसान रहता था । उसके परिवार में उसकी पत्नी और एक लड़का था। कुछ सालों के बाद पत्नी की मृत्यु हो गई । उस समय लड़के की उम्र दस साल थी । किसान ने दूसरी शादी कर ली। उस दूसरी पत्नी से भी किसान को एक पुत्र प्राप्त हुआ। किसान की दूसरी पत्नी की भी कुछ समय बाद मृत्यु हो गई। किसान का बड़ा बेटा जो पहली पत्नी से प्राप्त हुआ था जब शादी के योग्य हुआ तब किसान ने बड़े बेटे की शादी कर दी। फिर किसान की भी कुछ समय बाद मृत्यु हो गई। किसान का छोटा बेटा जो दूसरी पत्नी से प्राप्त हुआ था और पहली पत्नी से प्राप्त बड़ा बेटा दोनो साथ साथ रहते थे। कुछ समय बाद किसान के छोटे लड़के की तबीयत खराब रहने लगी। बड़े भाई ने कुछ आस पास के वैद्यों से ईलाज करवाया पर कोई राहत ना मिली।छोटे भाई की तबीयत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी और बहुत खर्च भी हो रहा था। एक दिन बड़े भाई ने अपनी पत्नी से सलाह किया कि यदि ये छोटा भाई मर जाए तो हमें इसके ईलाज के लिऐ पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ेगा। तब उसकी पत्नी ने कहा कि क्यों न किसी वैद्य से बात करके इसे जहर दे दिया जाए । किसी को पता भी नहीं चलेगा और रिश्तेदारी में भी कोई शक नहीं करेगा कि बीमार था, बीमारी से मृत्यु हो गई। बड़े भाई ने ऐसे ही किया । एक वैद्य से बात की कि मेरे छोटे भाई को जहर देना है, आप अपनी फीस बताओ । वैद्य ने बात मान ली और लड़के को जहर दे दिया और लड़के की मृत्यु हो गई। उसके भाई भाभी ने खुशियाँ मनाई कि रास्ते का काँटा निकल गया । अब सारी सम्पत्ति अपनी हो गई। उसका अन्तिम संस्कार कर दिया गया। कुछ महीनो पश्चात उस किसान के बड़े लड़के की पत्नी को लड़का हुआ । उन पति-पत्नी ने खूब खुशियाँ मनाई । बड़े ही लाड प्यार से लड़के की परवरिश की । कुछ दिनों बाद लड़का जवान हुआ। उन्होंने अपने लड़के की शादी कर दी! शादी के कुछ समय बाद अचानक लड़का बीमार रहने लगा। माँ बाप ने बहुत वैद्यों से उसका ईलाज करवाया। जिसने जितना पैसा माँगा दिया सब दिया कि लड़का ठीक हो जाए। अपने लड़के के ईलाज में अपनी आधी सम्पत्ति तक बेच दी पर लड़का बीमारी के कारण मरने की कगार पर आ गया। शरीर इतना ज्यादा कमजोर हो गया की अस्थि पिंजर शेष रह गया । एक दिन लड़के को चारपाई पर लेटा हुआ था और उसका पिता साथ मे बैठा अपने पुत्र की ये दयनीय हालत देख कर दुःखी होकर उसकी ओर देख रहा था । तभी लड़का अपने पिता से बोला कि भाई, अपना सब हिसाब हो गया बस अब कफन और लकड़ी का हिसाब बाकी है, उसकी तैयारी कर लो। ये सुनकर उसके पिता ने सोचा कि बीमारी के कारण लड़के का दिमाग काम नहीं कर रहा है और बोला बेटा मै तेरा बाप हूँ भाई नहीं । तब लड़का बोला मैं आपका वही भाई हूँ जिसे आपने जहर खिलाकर मरवाया था । जिस सम्पत्ति लिए आपने मुझे मरवाया था, अब वो मेरे ईलाज के लिऐ आधी बिक चुकी है । आपकी ही शेष है, हमारा हिसाब हो गया । तब उसका पिता फूट-फूट कर रोते हुए बोला कि मेरा तो कुल नाश हो गया । जो किया मेरे आगे आ गया पर तेरी पत्नी का क्या दोष है जो इस बेचारी को जिन्दा जलाया जाएगा (उस समय सतीप्रथा थी जिसमें पति के मरने के बाद पत्नी को पति की चिता के साथ जला दिया जाता था)। तब वो लड़का बोला की वो वैद्य कहाँ है जिसने मुझे जहर खिलाया था तब उसके पिता ने कहा की आप कि मृत्यु के तीन साल बाद वो मर गया था। तब लड़के ने कहा कि ये वही दुष्ट वैद्य है । आज मेरी पत्नी के रुप में है, मेरे मरने पर इसे जिन्दा जलाया जाएगा। बहनों और भाइयों, हमारे हर कर्म हमारा पीछा जन्म-जन्मान्तर तक करते हैं । तब तक, जब तक कि हिसाब बराबर नहीं हो जाता । अतः किसी को भी दुःख देने से पहले एक बार विचार अवश्य कर लें.....। 🍃💐🍃💐🍃💐🍃💐🍃💐🍃


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