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पाखंड

पाखंडी कविता  खूब पूजे ब्रह्मा विष्णु और महेश । घर में बचा ना कुछ भी शेष ।। खूब कराये यज्ञ और हवन । घर बेचकर पहुँच गए वन ।। खूब घूमें तीर्थ यात्रा । घर में बची ना अन्न की तनिक भी मात्रा ।। खूब गंगा जमुना नहाये । लौट के बुद्धू घर को आये ।। खूब पूजे लक्ष्मी गणेश । पैसा बचा ना एक भी शेष ।। दिया पंडो को भी खूब दान । मिला नही कहीं भगवान ।। पूजे खूब लक्ष्मण राम । घर के बिगड़े सारे काम ।। किये खूब व्रत उपवास । अपना शरीर भी रहा ना पास ।। खूब रखे पत्नी ने करवा चौथ । फिर भी पत्नी से पहले पति को आ गयी मौत ।। खूब पूजे लक्ष्मी दुर्गा और काली माई । घर में रही ना एक भी पाई ।। खूब बजाये मैंने मंदिर में घंटा । फिर भी भरा ना मेरा अंटा ।। खूब चढ़ाये मैंने माला फूल । फिर भी साफ़ हुई ना मन की धूल ।। खूब जलाई मैंने अगरबत्ती और धूप । फेफड़ो को धुआं जलाता खूब  इस कविता को अवश्य पढे है ऊँच नीच का रोग जहाँ मैं उस देश की गाथा गाता हूँ। भारत में रहने वालों की मैं दोगली बात बाताता हूँ।। भगवानों के नाम यहाँ मूर्ति पूजी जाती है। मन्दिर में जाने वालों की जाति पूछी जाती ...

वित्त आयोग का गठन

        वित्त आयोग पहला वित्त आयोग 1951 में गठित किया गया था। अब तक 15 वित्त आयोग गठित किये जा चुके हैं जो निम्न हैं-   वित्त आयोग - नियुक्ति वर्ष- ------अध्यक्ष --------- रिपोर्ट देने का वर्ष ------ रिपोर्ट प्रभावी रहने की अवधि  पहला------------- 1951---------- के. सी. नियोगी ------- 1953 ---------------------- 1953-1957  दूसरा ------------- 1956 ---------- के. संथानम----------- १९५७-------------------------   1957-1962  तीसरा ------------ 1960 ---------- ए. के. चंदा------------ 1962----------------------- 1962- 1966 चौथा -------------- 1964--------- डा. पी. वी. राजमन्नार-- 1966-----------------------1966-1969 पांचवा------------ 1968---------- महवीर त्यागी ---------- 1969---------------------- 1969- 1974 छठा ------------- 1972---------   ब्रह्मानंद रेड्डी ----------- 1973 ----------------------1974- 1979 सातवां------------ 1977---------- जे. पी. शेलात ---------- 1978---------------------- 1979- 1984...

आष्टांग मार्ग के अनुसार II

आष्टांग मार्ग के अनुसार  शील   सम्यक कर्मान्त :-                           सम्यक कर्मान्त हमे कुशल ब्यवहार की शिक्षा देता है जिसमे किसी दूसरे ब्यक्ति की भावनाओ और अधिकारों की क्षति न पहुंचे तथा हमारे कार्य का समन्वय जीवन के मुख्या नियमो स अधिक से अधिक हो सके.  जीव हिंसा, मिथ्याचार, चोरी, ब्यभिचार रहित कर्म करना ही सम्यक कर्मान्त है.  सम्यक आजीविका :-                           सम्यक आजीविका इस प्रकार की होनी चाहिए जिसमें किसी की हानि न हो न ही किसी  के प्रति  अन्याय हो।  सामान्य स्थितियों में हमें हथियारों का ब्यापार, प्राणियों का ब्यापार, मांस का ब्यापार, मद्य का ब्यापार व विष का ब्यापार नहीं करना चाहिए।  यही  वास्तविक सम्यक जीविका है। सम्यक ब्यायाम :-              ...

अष्टांग मार्ग के अनुसार

अष्टांग  मार्ग के अनुसार प्रज्ञा  सम्यक दर्ष्टि :-                     सम्यक दर्ष्टि का तातपर्य  यह है कि जो वास्तु प्राकृतिक रूप में जैसी है, उसको वैसा ही समझना अर्थात चार आर्यो का दर्शन करना , समझाना , प्रतीत्यसमुत्पाद का ज्ञान होना, इस प्रकार समस्त धर्मो के स्वाभाव को जानना कि संस्कार अनित्य है, सभी संस्कार दुख हैं, सभी संस्कार अनात्म हैं, का बोधा होना ही सम्यक दर्ष्टि है.  सम्यक संकल्प :-                        सम्यक संकल्प का अर्थ है कि  राग, हिंसा तथा प्रतिहिंसा रहित संकल्प रखना। अर्थात हमारी आशाएं, आकांछाएं एवं महत्वकांछाएं ऊँचे स्तर की हों, निम्न स्तर की न हों तथा हमारे योग्य हो अयोग्य नहीं।  सम्यक वाणी :-                      इसका अर्थ यह है कि -  १. सत्य  बोलना।   २. दुसरो की बुराई न करना।...

बौद्ध धर्म आर्य अष्टांगिक मार्ग

बौद्ध धर्म के अनुसार आर्य अष्टांगिक मार्ग    १. सम्यक दर्ष्टि २.  सम्यक संकल्प ३. सम्यक वाणी ४. सम्यक कर्मात ५. सम्यक आजीविका ६. सम्यक ब्यायाम ७. सम्यक स्मृति ८.  सम्यक समाधी उपरोक्त अष्टांगिक मार्गो में से पहले तीन मार्ग प्रज्ञा , दूसरे तीन मार्ग शील के तथा अंतिम दो मार्ग समाधी के हैं.      इन  मार्गो के विषय में अगली पोष्ट पर  पढ़े                                                                       नमो  बुद्धाय

बुद्ध विचार

गौतम बुद्धा के सुविचार  १. जो गुजर गया उसके बारे में मत सोचो और भविष्य के सपने  देखो केवल वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करो.  २. आप पूरे  ब्रह्माण्ड में कही  ऐसे ब्यक्ति को खोज ले जो आप को आप से  आप से ज्यादा प्यार करता हो, आप पाएंगे की जितना प्यार आप  खुद से करते है उतना आपसे कोई नहीं कर सकता है.  ३. स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन है और विश्वाश सबसे अच्छा सम्बन्ध है.  ४. हमें  और कोई नहीं बचा सकता, हमें अपने रस्ते पर खुद चलना है.  ५. तीन चीजे ज्यादा देर तक नहीं छुपी रह सकती है - सूर्य चन्द्रमा और सत्य।  ६. आपका मन ही सब कुछ है, आप जैसा सोचेंगे वैसा बन जायेंगे.  ७. अपने शरीर को स्वस्थ्य रखना भी कर्तब्य है, अन्यथा आप अपने  मन  और सोच को अच्छा नहीं   पाएंगे। ८. हम अपनी सोच से ही निर्मित होते है, जैसा सोचते है वैसे ही बन जाते हैं. जब मन शुद्ध होता है तो खुशियां परछाईं की तरह आप के साथ  चलती हैं.  ९. अपनी स्वयं की   क्षमता से...

भारत में भगवान

तर्कसंगत तथ्य इन्सान ने ही भगवान का निर्माण किया है इसके तार्किक सबूत निम्नलिखित है 1.मनुष्य के अलावा दुनिया का एक भी प्राणी भगवान को नही मानता। 2.जहाँ इन्सान नही पहुँचा वहाँ एक भी मंदिर मस्जिद या चर्च नही मिला। 3.अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग देवता है। इसका मतलब इन्सान को जैसी कल्पना सुझी वैसा भगवान बनाया गया। 4.दुनिया मे अनेक धर्म पंथ और उनके अपने-अपने देवता है। इसका अर्थ भगवान भी एक नही। 5.दिन प्रतिदिन नये नये भगवान तैयार हो रहे है। 6.अलग-अलग प्रार्थनायें है। 7. माना तो भगवान नही तो पत्थर यह कहावत ऐसे ही नही बनी। 8.दुनिया मे देवताओं के अलग-अलग आकार और उनको प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग पुजा। 9.अभी तक किसी इन्सान को भगवान मिलने के कोई प्रमाण नही है। 10.भगवान को मानने वाला और नही मानने वाला भी समान जिंदगी जीता है। 11भगवान किसी का भी भला या बुरा नही कर सकता। 12.भगवान भ्रष्टाचार अन्याय चोरी बलात्कार आतंकवाद अराजकता रोक नही सकता। 13.छोटे मासुम बच्चों पर बंदुक से गोलियाॅ दागने वालों के हाथ भगवान नही पकड सकता। 14.मंदिर मठ आश्रम प्रार्थना स्थल जहाॅ माना जाता है कि भ...

पर्यायवाची शब्द का नया तरीका

कविता द्वारा पर्यायवाची शब्द  ========================== सोम सुधाकर शशि राकेश                           राजा   भूपति   भूप   नरेश पानी अम्बु वारि या नीर                      वात हवा और अनिल समीर दिवा दिवस दिन या वासर                        पर्वत   अचल   शैल महिधर विश्व जगत जग भव संसार                         घर गृह आलय या आगार अग्नि पावक आग दहन                         ...

नए वर्ष पर

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नव वर्ष की मंगल कामनाएं  नए वर्ष की  नई पहल हो।  कठिन जिंदगी और सरल हो।   अन सुलझी जो रही पहेली।  अब उसका  शायद हल हो।   जो चलता है वक्त देखकर। आगे जाकर वही सफल हो ।    नए वर्ष  का उगता सूरज।  सबके लिए सुनहरा पल हो।  समय हमारा साथ सदा दे।   कुछ ऐसी हलचल आगे हो।   सुख के चौक पूरे हर द्वारे।  सुखमय आँगन का हर पल हो।