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जुलाई, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शयन विधान

💐 *शयन विधान*💐 *सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घंटे) के बाद ही शयन करना।* *सोने की मुद्रा:*            *उल्टा सोये भोगी,*            *सीधा सोये योगी,*            *डाबा सोये निरोगी,*            *जीमना सोये रोगी।* *शास्त्रीय विधान भी है।* *आयुर्वेद में ‘वामकुक्षि’ की बात आती हैं,* *बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिये हितकर हैं।* *शरीर विज्ञान के अनुसार चित सोने से रीढ़ की हड्डी को नुकसान और औधा या ऊल्टा सोने से आँखे बिगडती है।* *सोते समय कितने गायत्री मंन्त्र /नवकार मंन्त्र गिने जाए :-* *"सूतां सात, उठता आठ”सोते वक्त सात भय को दूर करने के लिए सात मंन्त्र गिनें और उठते वक्त आठ कर्मो को दूर करने के लिए आठ मंन्त्र गिनें।* *"सात भय:-"* *इहलोक,परलोक,आदान,* *अकस्मात ,वेदना,मरण ,* *अश्लोक (भय)* *शयन के लिए दिशा ज्ञान :-* *दक्षिणदिशा (South) में पाँव रखकर कभी सोना नहीं । यम और दुष्टदेवों का निवास है ।कान में हवा भरती है । मस्तिष्क  में रक्त का संच...

मंत्रोचारण

*रामचरितमानस* की चौपाइयों में ऐसी क्षमता है कि इन चौपाइयों के जप से ही मनुष्य बड़े-से-बड़े संकट में भी मुक्त हो जाता है। इन मंत्रो का जीवन में प्रयोग अवश्य करे _ आप के जीवन को सुखमय बना देगे। *1. रक्षा के लिए*_ मामभिरक्षक रघुकुल नायक | घृत वर चाप रुचिर कर सायक || *2. विपत्ति दूर करने के लिए*_ राजिव नयन धरे धनु सायक | भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक || *3. *सहायता के लिए*_ मोरे हित हरि सम नहि कोऊ | एहि अवसर सहाय सोई होऊ || *4*. *सब काम बनाने के लिए*_ वंदौ बाल रुप सोई रामू | सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू || *5*. *वश मे करने के लिए*_ सुमिर पवन सुत पावन नामू | अपने वश कर राखे राम || *6*. *संकट से बचने के लिए*_ दीन दयालु विरद संभारी | हरहु नाथ मम संकट भारी || *7*. *विघ्न विनाश के लिए*_ सकल विघ्न व्यापहि नहि तेही | राम सुकृपा बिलोकहि जेहि || *8*. *रोग विनाश के लिए*_ राम कृपा नाशहि सव रोगा | जो यहि भाँति बनहि संयोगा || *9. ज्वार ताप दूर करने के लिए*_ दैहिक दैविक भोतिक तापा | राम राज्य नहि काहुहि व्यापा || *10. दुःख नाश के लिए*_ राम भक्ति मणि उस बस जाके | दुःख ल...

हिंदुत्व के शिकार

हिंदुत्व क्या है?? हिन्दू होकर भी हिन्दू, हिन्दू को अपनी बेटी नहीं देता है. हिन्दू होकर, हिन्दू, हिन्दू को अपनी थाली में रोटी नहीं देता है. हिन्दू होकर भी हिन्दू, हिन्दू को मान नहीं देता, सम्मान नहीं देता, हिन्दू होकर, हिन्दू, हिन्दू के अधिकार छीन लेता है. हिन्दू होकर, हिन्दू, हिन्दू गरीबों का पेट काट लेता है. हिन्दू होकर, हिन्दू, हिन्दू के बच्चों से स्कूल-कालेजों में भेदभाव करता है. हिन्दू होकर, हिन्दू, हिन्दू को ही शासन-सत्ता में आगे बढ़ते नहीं देखना चाहता है. हिन्दू होकर, हिन्दू, हिन्दू के ही बाल-बच्चो का गला काट देता है. 〰〰〰 जो देवी देवताओं को पूजते हैं, ध्यान दें और जवाब दें । 1.एक भी ऐसे अछूत व्यक्ति का नाम बताएं जिसका भला किसी " देवी देवता " अथवा "भगवान " ने किया हो ? 2 ." संविधान " लागू होने से पहले किसी एक व्यक्ति को नौकरी दिलवाने वाले किसी देवता का नाम बताये ? 3. किसी भी ऐसे देवता का नाम बताएं जिसने " जाति - व्यवस्था "के खिलाफ संघर्ष किया हो ? किसी भी ऐसे देवता का नाम बताये जिसने जाति के कारण अपमानित होते हुए किसी अछूत क...

GST पर जोक

जाकी रही भावना,वैसी बनी GST की धारणा.. सरकारी धारणा G -Goods & S -Services, T-Tax मोदी जी  G- Good &  S-Simple,  T-Tax विपक्ष G- गई S- सरकार T- तेरी कर सलाहकार G-गये S- सारे T- टेक्स काले धन वाले G- गई S- सारी T-तिकडम मनचले G- गर्ल्स S- सेल्फी T-टेक्स सन्यासी G-घर S- संसार T- त्यागो गाँव के स्कूल का बच्चा G-Govt S-School T-Teacher आम आदमी G- Good Night S- Sweet Dream T- Take Care. सोना व्यापारी G- गलत S- सारे T- टेक्स पत्नी अपने पति से G-गलती S-सारी T- तुम्हारी 😜😜😜😜😜😜

धर्म ग्रन्थ

धर्म  ग्रंथो की  थोड़ी सी सच्चाई। 1 - यह जो ब्राम्हण, क्षेत्रीय, वैश्य व शूद्र जो विभाजन है वह मेरा द्वारा ही रचा गया है। - गीता 4-13 2 - मेरी शरण में आकर स्त्री ,वेश्य , शूद्र भी जिन कि उत्त्पति पाप योनि से हुइ है  परम  गति को प्राप्त हो जाते है। भगवत गीता 9-32 3 - शूद्र का प्रमुख कार्य तीनो वर्णो की सेवा करना है। - महाभारत  4/50/6 4 - शूद्र को सन्चित धन से स्वामी कि रक्षा करनी चाहिये। -  महाभारत 12/60/36 5 - शूद्र तपस्या करे तो राज्य निर्धनता में डूब जायेगा। - वाo .रामायण 7/30/74 6- ढोल .गवार .शूद् पशु नारी  |  सकल ताड़ना के अधिकारी || - रामचरित मानस 59/5 7- पूजिये विप्र सील गुन हीना, शूद्र न गुण गन ग्यान प्रविना। -रामचरितमानस 63-1 8- वह शूद्र जो ब्राम्हण के चरणो का धोवन पीता है राजा उससे कर TAX न ले। - आपस्तंबधर्म सूत्र 1/2/5/16 9 - जिस गाय का दूध अग्निहोत्र के काम आवे शूद्र उसे न छुये।  कथक सन्हिता 3/1/2 10- शूद्र केवल दूसरो का सेवक है इसके अतिरिक्त उसका कोइ अधिकार  नही है। - एतरेय ब्राम्हण 2/29/4 11- यदि कोइ ब्राम्हण शूद्र को शिक्षा...

सम्पन्न कौन?

पुरानी साड़ियों के बदले बर्तनों के लिए मोल भाव करती सम्पन्न घर की महिला ने अंततः दो साड़ियों के बदले एक टब पसंद किया। "नही दीदी, बदले में तीन साड़ियों से कम तो नही लूँगा।" बर्तन वाले ने टब को वापस अपने हाथ में लेते हुए कहा। "अरे भैया, एक एक बार की पहनी हुई तो हैं..बिल्कुल नये जैसी। एक टब के बदले में तो ये दो भी ज्यादा हैं, मैं तो फिर भी दे रही हूँ।" "नही नही, तीन से कम में तो नही हो पायेगा।" वह फिर बोला। एक दूसरे को अपनी पसंद के सौदे पर मनाने की इस प्रक्रिया के दौरान गृह स्वामिनी को घर के खुले दरवाजे पर देखकर सहसा गली से गुजरती अर्द्धविक्षिप्त महिला ने वहाँ आकर खाना माँगा। आदतन हिकारत से उठी महिला की नजरें उस महिला के कपड़ो पर गयी। अलग अलग कतरनों को गाँठ बाँध कर बनायी गयी उसकी साड़ी उसके युवा शरीर को ढँकने का असफल प्रयास कर रही थी। एकबारगी उसने मुँह बिचकाया पर सुबह सुबह का याचक है सोचकर अंदर से रात की बची रोटियां मंगवायी। उसे रोटी देकर पलटते हुए उसने बर्तन वाले से कहा "तो भैय्या क्या सोचा ? दो साड़ियों में दे रहे हो या मैं वापस रख लूँ !"...

तुलसी के गुण

तुलसी एक आयुर्वेदिक औषधि है। इसके गुणों को ध्यान पूर्वक पढ़ें। TULSI ELIX-R (एक बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि) तुलसी मुख्य रूप से पांच प्रकार की पायी जाती है ! श्याम तुलसी, राम तुलसी, श्वेत तुलसी, वन तुलसी, और नींबू तुलसी ! इन पांच प्रकार की तुलसी का अर्क विधि द्वारा अर्क निकाल कर ELIX-R तुलसी का निर्माण किया गया है । यह संसार की एक बेहतरीन एंटी-ऑक्सीडेंट , एंटी- बैक्टीरियल, एंटी- वायरल , एंटी- फ्लू, एंटी- बायोटिक , एंटी-इफ्लेमेन्ट्री व एंटी - डिजीज है. 1- ELIX-R तुलसी अर्क के एक बून्द एक ग्लास पानी में या 3 से 4 बून्द एक लीटर पानी में डाल कर पांच मिनट के बाद उस जल को पीना चाहिए। इससे पेयजल विषाणुओं और रोगाणुओ से मुक्त होकर स्वास्थ्यवर्धक पेय हो जाता है । 2- ELIX-R तुलसी अर्क २०० से अधिक रोगो में लाभदायक है. जैसे के फ्लू , स्वाइन फ्लू, डेंगू , जुखाम , खासी , प्लेग, मलेरिया , जोड़ो का दर्द, मोटापा, ब्लड प्रेशर , शुगर, एलर्जी , पेट के कीड़ो , हेपेटाइटिस , जलन, मूत्र सम्बन्धी रोग, गठिया , दम, मरोड़, बवासीर , अतिसार,आँख का दर्द , दाद खाज खुजली, सर दर्द, पायरिया नकसीर, फेफड़ो सूजन, अल्सर ,...

सावन सोमवार का महत्व

*!! सावन विशेषांक !!* *इस बार भगवान शिव का प्रिय मास सावन में 50 साल बाद विशेष संयोग बन रहा है। खास यह कि सोमवार से इस माह की शुरुआत हो रही और समापन भी सोमवार को ही होगा। यह काफी शुभ फलदायक है। 10 जुलाई से सावन की शुरुआत होगी और 7 अगस्त को रक्षाबंधन यानी सावन पूर्णिमा है।* वर्षों बाद इस बार सावन मास में पांच सोमवार है। खास बात यह कि वैधृति योग के साथ सावन प्रारंभ हो रहा है और आयुष्मान योग के साथ इस मास की समाप्ति। सोमवार, सावन मास, वैधृति योग व आयुष्मान योग सभी के मालिक स्वयं शिव ही हैं। इस लिए इस बार का सावन खास है। पुराणों के अनुसार सावन में भोले शंकर की पूजा, अभिषेक, शिव स्तुति, मंत्र जाप का खास महत्व है। खासकर सोमवार के दिन महादेव की आराधना से शिव और शक्ति दोनों प्रसन्न होते हैं। इनकी कृपा से दैविक, दैहिक और भौतिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। निर्धन को धन और नि:संतान को संतान की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। बाबा भोले की पूजा से भाग्य पलट सकता है। सावन में सोमवार का है *विशेष महत्व सावन मास में प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व है*। प्रायः सावन में च...

गुरू पर्व

*गुरु ही मीत है*                      *गुरु ही प्रीत है* *गुरु ही जीवन है*                      *गुरु ही प्रकाश है*       *गुरु ही सांस है*                      *गुरु ही आस है* *गुरु ही प्यास हैै*                      *गुरु ही ज्ञान है* *गुरु ही ससांर है*                      *गुरु ही प्यार है* *गुरु ही गीत है*                      *गुरु ही संगीत है* *गुरु ही लहर है*                      *गुरु ही भीतर है* *गुरु ही बाहर है*                      *गुरु ही बहार है* *गुरु ही प्राण है*           ...

जिले की वेबसाइट

उत्तर प्रदेश के जिले की वेबसाइट आगरा Website : http://agra.nic.in/ अलीगढ़ Website : http://aligarh.nic.in/ अलाहाबाद Website : http://allahabad.nic.in/ अम्बेडकर नगर Website : http://ambedkarnagar.nic.in/ औरयां Website : http://auraya.nic.in/ आजमगढ़ Website : http://azamgarh.nic.in/ बाघपत Website : http://bagpat.nic.in/ बहराइच Website : http://behraich.nic.in/ बलीया Website : http://ballia.nic.in/ बलरामपुर Website : http://balrampur.nic.in/ बांदा Website : http://banda.nic.in/ बाराबंकी Website : http://barabanki.nic.in/ बरेली Website : http://bareilly.nic.in/ बस्ती Website : http://basti.nic.in/ बिजनोर Website : http://bijnor.nic.in/ बदांयू Website : http://badaun.nic.in/ बुलन्दशहर Website : http://bulandshahar.nic.in/ चन्दौली Website : http://chandauli.nic.in/ चित्रकूट Website : http://chitrakoot.nic.in/ देवरिया Website : http://deoria.nic.in/ एटा Website : http://etah.nic.in/ इटावा Website : http://etawah.nic.in/ फैजाबाद Website : http://faizabad.nic.in/ फरूखाबाद Website : http://farr...

शिक्षा ब्यवस्था

 उत्तर प्रदेश शिक्षा ब्यवस्था जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी की योगी सरकार आयी थी और योगी जी cm बने तो सोचा था शिक्षा विभाग का जो मजाक उडाया जाता था वो कुछ हद तक समाप्त होगा पर मैं गलत था मै भूल गया था कि चेहरे बदलते हैं सरकारें नहीं !! लूटने  ,झूठ बोलने , वेतन /पारीश्रमिक कम देना और कर्मचारियो को  शोषण करने के लिये कल की सरकारें भी अग्रणी थीं और आज की बीजेपी सरकार भी अग्रणी है।। सोचा था मैंने कि प्रदेश को जब नये निजाम मिलेंगे तो up के प्रत्येक  प्राइमरी  विद्यालय को कम से कम प्रत्येक class(कक्षा1,2,3,4,5) को कम से कम पाँच 5 अध्यापक (teacher)(शिक्षक)मिल सकेंगे तथा एक प्रधानाध्यापक जो 5 शिक्षक अपनी अपनी class में अलग अलग केवल शिक्षा का काम  आराम से शिक्षण कार्य में करा सकें !! पर मै यहाँ भी गलत साबित हुआ । इनसे तो बेहतर पूर्व की  सरकार थी जो प्रत्येक विद्यालय मे पर्याप्त शिक्षक पहुँचा देने का दमखम भरती थी । इस समय प्रदेश मे सरप्लस अध्यापक की हवा चल रही है , क्या परिभाषा है आपके सरप्लस की......आपके अनुसार सरप्लस तब है जब मेरे विद्यालय मे 88 बच्चे हैं और शि...

क्रांति और आंदोलन

इतिहास की विशेष जानकारी अंग्रेजों ने भारत पर 150 वर्षों तक राज किया ब्राह्मणों ने उनको भगाने का हथियार बन्द आंदोलन क्यों चलाया?  जबकि भारत पर सबसे पहले हमला मुस्लिम शासक मीर काशीम ने 712 ई. किया! उसके बाद महमूद गजनबी, मोहमंद गौरी,चन्गेज खान ने हमला किये और फिर कुतुबदीन एबक, गुलाम वंश, तुग्लक वंश, खिल्जीवंश, लोदि वंश फिर मुगल आदी वन्शो ने भारत पर राज किया और खूब अत्याचार किये लेकिन ब्राह्मण ने कोइ क्रांति या आंदोलन नही चलाया! फिर अन्ग्रेजो के खिलाफ़ ही क्यो क्रांति कर दी? जानिये क्रांति और आंदोलन की वजह 1- अंग्रेजो ने 1795 में अधिनयम 11 द्वारा शुद्रों को भी सम्पत्ति रखने का कानून बनाया। 2- 1773 में ईस्ट इंडिया कम्पनी ने रेगुलेटिग एक्ट पास किया जिसमें न्याय व्यवस्था समानता पर आधारित थी। 6 मई 1775  को इसी कानून द्वारा बंगाल के सामन्त ब्राह्मण नन्द कुमार देव को फांसी हुई थी। 3- 1804 अधिनीयम 3 द्वारा कन्या हत्या पर रोक अंग्रेजों नेलगाई (लडकियों के पैदा होते ही तालु में अफीम चिपकाकर, माँ के स्तन पर धतूरे का  लेप लगाकर, एवम् गढ्ढाबनाकर उसमें दूध डालकर डुबो कर मारा ज...

मृत्युभोज

👌🏻मृत्युभोज से ऊर्जा नष्ट होती है महाभारत के अनुशासन पर्व में लिखा है कि ..... मृत्युभोज खाने वाले की ऊर्जा नष्ट हो जाती है। जिस परिवार में मृत्यु जैसी विपदा आई हो उसके साथ इस संकट की घड़ी में जरूर खडे़ हों और तन, मन, धन से सहयोग करें  लेकिन......बारहवीं या तेरहवीं पर मृतक भोज का पुरजोर बहिष्कार करें। महाभारत का युद्ध होने को था,  अतः श्री कृष्ण ने दुर्योधन के घर जा कर युद्ध न करने के लिए संधि करने का आग्रह किया । दुर्योधन द्वारा आग्रह ठुकराए जाने पर श्री कृष्ण को कष्ट हुआ और वह चल पड़े,  तो दुर्योधन द्वारा श्री कृष्ण से भोजन करने के आग्रह पर कृष्ण ने कहा कि 🍁 ’’सम्प्रीति भोज्यानि आपदा भोज्यानि वा पुनैः’’ अर्थात् "जब खिलाने वाले का मन प्रसन्न हो, खाने वाले का मन प्रसन्न हो,  तभी भोजन करना चाहिए। 🍁 लेकिन जब खिलाने वाले एवं खाने वालों के दिल में दर्द हो, वेदना हो, तो ऐसी स्थिति में कदापि भोजन नहीं करना चाहिए।" 🍁 हिन्दू धर्म में मुख्य 16 संस्कार बनाए गए है,  जिसमें प्रथम संस्कार गर्भाधान एवं अन्तिम तथा 16वाँ संस्कार अन...

तृष्णा

🌻धम्म प्रभात🌻                  उपादान  (रागयुक्त ग्रहण - तीव्र लालसा) (प्रतीत्य समुत्पाद की नवमी कडी) तण्हा पच्चया उपादान । तृष्णा के कारण (प्रत्यय)  से उपादान। तृष्णा से आसक्ति या उपादान उत्पन्न होता हैं। किसी वस्तु के प्रति राग पैदा करके उसे ग्रहण करना या ग्रहण करने की इच्छा का होना उपादान कहलाता हैं। इंद्रियों द्वारा इंद्रियों के विषयों (रूप, शब्द, गंध, रस, स्पर्श) के साथ संपर्क =स्पर्श किए जाने पर होने वाली अनुभूति के परिणाम स्वरूप उन अच्छे लगने वाले विषयों को ग्रहण करना अथवा उनके प्रति रागयुक्त हो उन्हें या उनके से किसी एक को ग्रहण करने की इच्छा करना ही उपादान हैं। तथागत बुद्ध ने कहा - - "भिक्षुओं! ये चार उपादान हैं। कौन से चार? 1) काम (इंद्रिय भोग) - उपादान 2) दृष्टि (धारणा) - उपादान 3) शील व्रत - उपादान 4)आत्मवाद-उपादान भिक्षुओं ! ये चार उपादान किस निदान (कारण) वाले, किस समुदय वाले, किस जाति वाले (प्रभाव) वाले हैं? ये चारों उपादान तृष्णा निदान वाले, तृष्णा समुदय वाले, तृष्णा जाति वाले, और तृष्णा प...

108 का अर्थ

🌻धम्म प्रभात 🌻             तण्हा-- तृष्णा (प्रतीत्य समुत्पाद की आठवीं कडी) वेदना पच्चया तण्हा। वेदना के कारण (प्रत्यय)  से तृष्णा। तथागत बुद्ध ने कहा - यायं तण्हा पोनोभविका नन्दिरागसहगता तत्रतत्राभिनन्दिनी, सेय्याथीदं - कामतण्हा, भवतण्हा, विभवतण्हा - यो जो तृष्णा हैं - फिर जन्म ने की, नन्दिराग सहित जहां तहां प्रसन्न होने वाली, जैसे कि काम तृष्णा, भव तृष्णा, विभव तण्हा। वेदना के कारण तृष्णा उत्पन्न होती हैं। भिक्खुओ को संबोधित करते हुए घम्म सेनापति सारिपुत्त ने कहा - जब आवुस ! आर्य श्रावक तृष्णा को जानता हैं, तृष्णा के समुदय (कारण) को जानता हैं, तृष्णा के निरोघ को जानता हैं तब वह तृष्णा का मुलोच्छेद करने के लिए प्रयत्न करता हैं। आवुस! तृष्णा के यह छः आकार हैं - रुप तृष्णा, शब्द तृष्णा, गंध तृष्णा, रस तृष्णा, स्प्रष्टव्य तृष्णा, धम्म तृष्णा । वैसे मुख्यतः काम तृष्णा भव तृष्णा, विभव तृष्णा - ये तीन ही हैं। इसके पहले के छःसे गुणा करने से अठारह तृष्णाएं (3 ×6=18) हो जाती हैं। इसको आध्यात्मिक एवं बाह्य इन दो सन्तानों से गुणा करने से त...