अगर देखे होते हमने सितारों के खाब तो माना की ए मुस्किल था ,
'नीरज' मगर हम पहुच गए होते अब तक चाँद तक चलते- चलते।
नीरज सर के द्वारा
दर्पण में दिखने वाला हर चेहरा, सुन्दर नहीं होता।
फिर भी दर्पण किसी भी चेहरे को देखने से इंकार नहीं करता।।
राम स्वरुप सर के द्वारा
'नीरज' मगर हम पहुच गए होते अब तक चाँद तक चलते- चलते।
नीरज सर के द्वारा
दर्पण में दिखने वाला हर चेहरा, सुन्दर नहीं होता।
फिर भी दर्पण किसी भी चेहरे को देखने से इंकार नहीं करता।।
राम स्वरुप सर के द्वारा
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें