आष्टांग मार्ग के अनुसार II
आष्टांग मार्ग के अनुसार शील सम्यक कर्मान्त :- सम्यक कर्मान्त हमे कुशल ब्यवहार की शिक्षा देता है जिसमे किसी दूसरे ब्यक्ति की भावनाओ और अधिकारों की क्षति न पहुंचे तथा हमारे कार्य का समन्वय जीवन के मुख्या नियमो स अधिक से अधिक हो सके. जीव हिंसा, मिथ्याचार, चोरी, ब्यभिचार रहित कर्म करना ही सम्यक कर्मान्त है. सम्यक आजीविका :- सम्यक आजीविका इस प्रकार की होनी चाहिए जिसमें किसी की हानि न हो न ही किसी के प्रति अन्याय हो। सामान्य स्थितियों में हमें हथियारों का ब्यापार, प्राणियों का ब्यापार, मांस का ब्यापार, मद्य का ब्यापार व विष का ब्यापार नहीं करना चाहिए। यही वास्तविक सम्यक जीविका है। सम्यक ब्यायाम :- ...