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आष्टांग मार्ग के अनुसार II

आष्टांग मार्ग के अनुसार  शील   सम्यक कर्मान्त :-                           सम्यक कर्मान्त हमे कुशल ब्यवहार की शिक्षा देता है जिसमे किसी दूसरे ब्यक्ति की भावनाओ और अधिकारों की क्षति न पहुंचे तथा हमारे कार्य का समन्वय जीवन के मुख्या नियमो स अधिक से अधिक हो सके.  जीव हिंसा, मिथ्याचार, चोरी, ब्यभिचार रहित कर्म करना ही सम्यक कर्मान्त है.  सम्यक आजीविका :-                           सम्यक आजीविका इस प्रकार की होनी चाहिए जिसमें किसी की हानि न हो न ही किसी  के प्रति  अन्याय हो।  सामान्य स्थितियों में हमें हथियारों का ब्यापार, प्राणियों का ब्यापार, मांस का ब्यापार, मद्य का ब्यापार व विष का ब्यापार नहीं करना चाहिए।  यही  वास्तविक सम्यक जीविका है। सम्यक ब्यायाम :-              ...

अष्टांग मार्ग के अनुसार

अष्टांग  मार्ग के अनुसार प्रज्ञा  सम्यक दर्ष्टि :-                     सम्यक दर्ष्टि का तातपर्य  यह है कि जो वास्तु प्राकृतिक रूप में जैसी है, उसको वैसा ही समझना अर्थात चार आर्यो का दर्शन करना , समझाना , प्रतीत्यसमुत्पाद का ज्ञान होना, इस प्रकार समस्त धर्मो के स्वाभाव को जानना कि संस्कार अनित्य है, सभी संस्कार दुख हैं, सभी संस्कार अनात्म हैं, का बोधा होना ही सम्यक दर्ष्टि है.  सम्यक संकल्प :-                        सम्यक संकल्प का अर्थ है कि  राग, हिंसा तथा प्रतिहिंसा रहित संकल्प रखना। अर्थात हमारी आशाएं, आकांछाएं एवं महत्वकांछाएं ऊँचे स्तर की हों, निम्न स्तर की न हों तथा हमारे योग्य हो अयोग्य नहीं।  सम्यक वाणी :-                      इसका अर्थ यह है कि -  १. सत्य  बोलना।   २. दुसरो की बुराई न करना।...

बौद्ध धर्म आर्य अष्टांगिक मार्ग

बौद्ध धर्म के अनुसार आर्य अष्टांगिक मार्ग    १. सम्यक दर्ष्टि २.  सम्यक संकल्प ३. सम्यक वाणी ४. सम्यक कर्मात ५. सम्यक आजीविका ६. सम्यक ब्यायाम ७. सम्यक स्मृति ८.  सम्यक समाधी उपरोक्त अष्टांगिक मार्गो में से पहले तीन मार्ग प्रज्ञा , दूसरे तीन मार्ग शील के तथा अंतिम दो मार्ग समाधी के हैं.      इन  मार्गो के विषय में अगली पोष्ट पर  पढ़े                                                                       नमो  बुद्धाय