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४० की उम्र अवस्य पढ़े

*ये उम्र चालीस की बड़ी अजीब होती है...!* न बीस का ज़ोश, न साठ की समझ, ये हर तरफ से गरीब होती है। *ये उम्र चालीस की बड़ी अजीब होती है...!* सफेदी बालों से झांकने लगती है, तेज़ दौड़ो तो सांस हाँफने लगती है। टूटे ख़्वाब, अधूरी ख़्वाहिशें, सब मुँह तुम्हारा ताकने लगती है। ख़ुशी बस इस बात की होती है, की ये उम्र सबको नसीब होती है। *ये उम्र चालीस की बड़ी अजीब होती है...* न कोई हसीना मुस्कुराके देखती है, ना ही नजरों के तीर फेंकती है, और आँख लड़ भी जाये जो गलती से, तो ये उम्र तुम्हें दायरे में रखती है। कदर नहीं थी जिसकी जवानी  में, वो पत्नी अब बड़ी करीब होती है *ये उम्र चालीस की बड़ी अजीब होती है...!* वैसे, नज़रिया बदलो तो शुरू से शुरवात हो सकती है, आधी तो अच्छी गुज़री है, आधी और बेहतर गुज़र सकती है। थोड़ा बालों को काला और दिल को हरा कर लो, अधूरी ख्वाहिशों से  कोई समझौता कर लो। ज़िन्दगी तो चलेगी अपनी रफ़्तार से, तुम बस अपनी रफ़्तार काबू में कर लो। फिर देखिए ये कितनी खुशनसीब होती है .. *ये उम्र चालीस की बड़ी अजीब होती है...!* *40 की उम्र के समीप (आस- पास) पहुचे सभी म...

बौद्ध परम्परा के अनुसार चतुर्मास /वर्षावास

चतुर्मास /वर्षावास                 ------------------------------------------------  वर्षावास जिसे पाली भाषा में वस्सावास कहा जाता है। वर्षावास का अभिप्राय किसी एक स्थान पर वास करना या निवास करना होता है । बौद्ध परंपरा में आषाढ़ मास की पूर्णमासी से वर्षावास प्रारंभ होता है और आश्विन मास की पूर्णमासी को समाप्त होता है । यह वर्षावास 4 माह का होता है । इसलिए इसे चतुर्मास भी कहते हैं । इस दौरान बौद्ध भिक्षु किसी एक बुद्ध विहार में रहकर अध्ययन करते हैं, ध्यान साधना करते हैं , ज्ञान अर्जन करते हैं , फिर पुनः वर्ष के शेष महीनों में भ्रमण या चारिका करने निकल पडते हैं। 1. आषाढ मास की पूर्णिमा को सिद्धार्थ गौतम मानवता के कल्याण के लिए गृहत्याग किए थे , जिसे महाभिनिष्क्रमण कहा जाता है। इसी दिन बोधगया में बुद्धत्व प्राप्ति के उपरांत सारनाथ/ इसीपत्तन में पंचवग्गीय भिक्षुओं को प्रथम बार धर्म उपदेश दिया था। पहला ज्ञान दिया था । इसलिए इसे धम्मचक्क पवत्तन कहा जाता है। 2. सावन मास की पूर्णमासी को बौद्ध धर्म परिषद द्वारा मगध नरेश बिंबसार के पुत्र अजातशत्रु...

रक्षाबंधन

🌸🌸🌸🌸🌸 *सच रक्षाबंधन का* *अपना तर्क लगायें.* *इतिहास को जाने.* *नया इतिहास रचें.* 🍃🍃🍃🍃🍃 *रक्षाबंधन* भाई-बहन का त्योहार नहीं है. क्या हिंदुओं में ही भाई-बहन होते हैं. सिक्ख, मुसलमानों, ईसाईयों, जैन, पारसियों या बौद्धों में भाई-बहन नहीं होते! यदि यह त्यौहार भाई-बहनों का त्यौहार होता तो सिक्ख, मुसलमान, ईसाई, जैन पारसी या बौद्ध भाई-बहन भी इसे मनाते, *वर्ण व्यवस्था* के अनुसार यह ब्राह्मणों का त्योहार है। इतिहास काल से अब तक ब्राह्मणों द्वारा क्षत्रियों को रक्षा सूत्र बांधा जाता रहा है उन्हे ब्राह्मणों की रक्षा की शपथ दिलाई जाती रही है। *”धर्मशास्त्र का इतिहास”* नामक पुस्तक के चौथेखण्ड के पृष्ठ १२४ में *भारत रत्न पी वी काणे (पांडुरंग वामनराव काणे)* लिखते है “आज ब्राम्हण शूद्र के घरों मे जाकर उन्हें तथा कथित रक्षा सूत्र (जो वास्तव मे बंधक सूत्र है) बाँधते हुये देखे जा सकते हैं और वह रक्षा सूत्र बांधते है तो संस्कृत का श्लोक भी पढ़ते है।मन्त्र:- *“येन बध्दो, दानेन्द्रो बलि राजा महाबल:।* *तेन त्वाम प्रति बधनामिअहम रक्षे माचल, माचल, माचल।।* अर्थात जिस प्रकार तुम्हारे दान...

मौत का कारण बन सकता है सेब

स्वास्थ्य इंसान के मौत का कारण बन सकता है सेब, तो हो जाइए सावधान इंग्लिश में एक कहावत बहुत ही मशहूर है। 'An Apple a day keeps doctor away' इसका मतलब है रोजाना एक सेब खाने से आपको डॉक्टर की जरूरत कभी नहीं होगी। लेकिन अगर हम आपको कहे कि यही सेब आपकी मौत का कारण भी बन सकता है तो? जी हां सेब भी आपकी मौत का कारण बन सकती है। दरअसल, सेब के बीज में एक जहरीला तत्व पायया जाता है कि जिसका नाम है एमिगडलिन। अगर एमिगडलिन किसी भी इंसान के पाचन एन्जाइम के संपर्क में आता है तो ये सायनाइड रिलीज करने लगता है। प्राकृतिक तौर पर बीजों की कोटिंग काफी हार्ड होती है जिसे तोड़ पाना आसान नहीं है। एमिगडलिन में सायनाइड और चीनी होता है और जब इसे हमारा शरीर निगल लेता है तो वह हाईड्रोजन सायनाइड में तब्दील हो जाता है। श्रीदेवी की हालिया रिलीज हुई फिल्म मॉम में एक सीन है जहां श्रीदेवी अपनी बेटी का रेप करने वाले अपराधियों से बदला ले रही है। उन अपराधियों में से एक को वो सेब के बीजों से मार डालती है। आपने बिल्कुल सही पढ़ा, सेब के बीजों से मार डालती है। सेब को दुनिया के सबसे सेहतमंद फलों में से एक माना जात...