संदेश

नवंबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पर्वो की विशेषता

मूलनिवासी पर्व (1) गुरु पूर्णिमा :- गौतम बुद्ध ने आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सारनाथ में प्रथम बार पांच परिज्रावको को दीक्षा दी थी। ये दिन बौद्धों के जीवन में गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता था। बौद्ध धर्म समाप्त करने के बाद ब्राह्मण धर्म के ठेकेदारो ने इस पर कब्ज़ा किया। (2) कुम्भ मेला :- कुम्भ का मेला बौद्ध सम्राट हर्षवर्धन ने शुरू करवाया था जिसका उद्देश्य बुद्ध की विचारधारा को फैलाना था। इस मेले में दूर दूर से बौद्ध भिक्षु, श्रमण,राजा,प्रजा, सैनिक भाग लेते थे। बौद्ध धर्म समाप्त करने के पश्चात ब्राह्मणों ने इसको अपने धर्म में  लेकर अन्धविश्वास घुसा दिया। (3) चार धाम यात्रा :- बौद्ध धर्म में चार धामों का विशेष महत्त्व था। ब्राह्मणों ने बौद्ध धर्म के चार धामो को अपने काल्पनिक देवी-देवताओ के मंदिरो में बदल दिया और अपने धर्म से जोड़ दिया। (4) जातक कथाएँ :-  जातक कथाये बौद्ध धर्म में विशेष महत्त्व रखती है। इन कथाओ द्वारा बौद्धिस्ट की दस परमिताओं को समझाया जाता था। कुछ कथाये गौतम बुद्ध काल की और कुछ बाद की लिखी गयी है। बौद्ध धर्म समाप्त करने के पश्चात ब्राह्मणों ने इन कथाओ क...

सत्य व अर्धसत्य

आइये समाज में फैले कुछ षड्यंत्रों पर प्रकाश डालें :- अर्धसत्य ---फलां फलां तेल में कोलेस्ट्रोल नहीं होता है! पूर्णसत्य --- किसी भी तेल में कोलेस्ट्रोल नहीं होता ये केवल यकृत में बनता है । ✅ अर्धसत्य ---सोयाबीन में भरपूर प्रोटीन होता है ! पूर्णसत्य---सोयाबीन सूअर का आहार है मनुष्य के खाने लायक नहीं है! भारत में अन्न की कमी नहीं है, इसे सूअर आसानी से पचा सकता है, मनुष्य नही ! जिन देशों में 8 -9 महीने ठण्ड रहती है वहां सोयाबीन जैसे आहार चलते है । ✅ अर्धसत्य---घी पचने में भारी होता है पूर्णसत्य---बुढ़ापे में मस्तिष्क, आँतों और संधियों (joints) में रूखापन आने लगता है, इसलिए घी खाना बहुत जरुरी होता है !और भारत में घी का अर्थ देशी गाय के घी से ही होता है । ✅ अर्धसत्य---घी खाने से मोटापा बढ़ता है ! पूर्णसत्य---(षड्यंत्र प्रचार ) ताकि लोग घी खाना बंद कर दें और अधिक से अधिक गाय मांस की मंडियों तक पहुंचे, जो व्यक्ति पहले पतला हो और बाद में मोटा हो जाये वह घी खाने से पतला हो जाता है✅ अर्धसत्य---घी ह्रदय के लिए हानिकारक है ! पूर्णसत्य---देशी गाय का घी हृदय के लिए अमृत है,  पं...