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सितंबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

असम्भव बीमारी का पूर्ण इलाज

कैंसर का  १०० प्रतिशत इलाज संभव  पपीते के पत्तो से बनी चाय किसी  भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ ६० से ९० दिनों में जड़ से ख़त्म कर देगी  अभी तक लोगो ने केवल पपीते के पत्तो को बहुत ही सीमीत तरीके से उपयोग किया होगा जसे प्लेटलेट्स के कम होने पर या त्वचा संबंधी रोग हो जाने पर इसका उयपयोग किया  है. परन्तु पपीता यही तक सीमीत नहीं है इसके गुण और भी बहुत कुछ है.  पपीता प्राकृतिक शक्तियों से भरपूर है पपीता के सभी भागों फल, ताना , बीज, पत्तियां, जड़ , सभी के अंदर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसकी ब्रद्धी को रोकने का गुण बहुतायत पाया गया।    UNIVERSITY OF FLORIDA AND International Doctors And Researchers From US and Japan में हुए शोधो से पता चला है की पपीते के पत्तो में कैंसर की कोशिका  को नष्ट करने की छमता पाई जाती है . Nam Dang MD, Phd जो की एक शोध कर्ता हैं के अनुसार पपीता की पत्तियों से लगभग १० प्रकार का कैंसर समाप्त हो सकता है उनमे से  कुछ निम्न हैं  1. Breast cancer 2. Lung cancer 3. Liver cancer 4. Pancreatic...

संविधान से पहले कैसे थे पूर्वज

संविधान से पहले पूर्वज  हिन्दू का चोला पहने अंधेरे में जीने वाले इसे पढ़ो सायद ज़मीर जाग जाय आओ जाने और समझे, संविधान से पहले हमारे बाप दादा और हमारी पीढियां कहाँ, कैसे और किन हालातों में रहते थे = = = = = = = = = = = = = = = = 1 हम लोग कच्चे घरों में, तम्बूओं में, झोपडियो में अमीरों की हदों से हट कर गांव से बाहर तालाब किनारे रहते थे। 2 धर्म प्रथा, जाति प्रथा, सति प्रथा, छूत प्रथा, रीति रिवाज, संस्कृति, परंपराओं और अमीरों के अपने ही बनाए गए कायदे कानून के तहत हम गुलाम थे 3 अच्छा खाना, अच्छा पहनना, बडे लोगों की बराबरी करना, अपने हक के लिए लडना, और पढाई करने का हमें कोई भी हक नहीं था। 4 : हमारे वैद्य ( डाक्टर ),धर्म गुरु और हमारी पंचायतें भी अलग होती थी। 5 अमीर - गरीब, छोटे - बडे, ऊंच - नीच , और जातिवाद की दीवारें होती थी। 6 हम औरों के टुकडों पर पलने वाले थे। 7 हमारा अपना कुछ भी वजूद नहीं था। 8 समाज में हमारा आदर, मान , सम्मान,इज्जत, नाम और पहचान कुछ भी नहीं था। 9 हमें मनहूस समझा जाता था। 10 हमारी औरतों से मनचाही मनमानी और बदसलूकीया की जाती थी। 11 हमें गुलाम बना कर ख...

नाथू राम के विषय में विशेष

ऐसे 'बहादुर’, 'चरित्रवान’ और 'देशभक्त’ थे गांधी के हत्यारे नाथूराम एक टपोरी किस्म का व्यक्ति था जिसे कतिपय हिंदू उग्रवादियों ने गांधी की हत्या के लिए भाडे पर रखा हुआ था। जेल में उसकी चिकित्सा रपटों से पता चलता है कि उसका मस्तिष्क अधसीसी के रोग से ग्रस्त था...       महात्मा गांधी के हत्यारे गिरोह के सरगना नाथूराम गोडसे को महिमामंडित करने के जो प्रयास इन दिनों किए जा रहे हैं, वे नए नहीं हैं। गोडसे का संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बताया जाता रहा है और इसीलिए गांधीजी की हत्या के बाद देश के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने संघ पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि संघ गोडसे से अपने संबंधों को हमेशा नकारता रहा है और अपनी इस सफाई को पुख्ता करने के लिए वह गोडसे को गांधी का हत्यारा भी मानता है और उसके कृत्य को निंदनीय करार भी देता है। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर क्या वजह है कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के सत्तारूढ होने के बाद ही गोडसे को महिमामंडित करने का सिलसिला तेज हो गया? इस सिलसिले में एकाएक उसका मंदिर बनाने के प्रयास शुरू हो गए। उसकी 'जयंती’ और...